अचिंता शुली का जीवन परिचय | Achinta Sheuli Biography In Hind

अचिंता शुली का जीवन परिचय | Achinta Sheuli Biography in Hindi

अचिंता शुली का जीवन परिचय, वेटलिफ्टिंग ,जन्म, शिक्षा, कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 ( Achinta Sheuli Biography in Hindi ,Age, Weightlifting, Family, Commonwealth Games 2022 )

अचिंता शुली एक भारतीय भारोत्तोलक है जो 73 किलोग्राम भार वर्ग में अपना करती है। उन्होंने 2021 जूनियर विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता और दो बार राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप के स्वर्ण पदक विजेता हैं।

साल 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में, उन्होंने 313 किलोग्राम का खेलों का रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया है ।

अचिंता शुली का जीवन परिचय | Achinta Sheuli Biography in Hindi
अचिंता शुली

अचिंता शुली का जीवन परिचय

पूरा नाम (Full Name)अचिंता शुली
जन्म (Birth)24 नवंबर, 2001 
उम्र (Age)21 साल (2022 )
जन्म स्थान (Birth Place)देउलपुर , पश्चिम बंगाल , भारत
राष्ट्रीयता (Nationality)भारतीय
वजन (Weight)60 किलो
गृहनगर (Hometown)देउलपुर , पश्चिम बंगाल , भारत
आंखों का रंग (Eye Colour)काला
बालों का रंग (Hair Colour)काला
पेशा (Profession)वेटलिफ्टिंग 
वैवाहिक स्थिति (Marital Status)अवैवाहिक

अचिंता शुली का जन्म एवं शुरुआती जीवन

अचिंता शुली का जन्म को 24 नवंबर, 2001 को पश्चिम बंगाल के देउलपुर में हुआ था जन्मे , शुली ने वेटलिफ्टिंग में सबसे पहले शुरुआत साल 2011 से की थी , जब उन्होंने एक स्थानीय जिम का दौरा किया, जहाँ उनके बड़े भाई, आलोक ने प्रशिक्षण लिया था। 

एक गरीब परिवार से आने वाले, जहां उनके पिता जगत साइकिल रिक्शा चलाते थे और अपने बच्चों को पालने के लिए एक मजदूर के रूप में काम करते थे।

अचिंता के लिए पेशेवर प्रशिक्षण लेना आसान नहीं था। 2013 में स्थिति और खराब हो गई, जब उनके पिता की एक स्ट्रोक से मृत्यु हो गई, जिससे उनका भाई परिवार का एकमात्र कमाने वाला बन गया।

अचिंता की मां पूर्णिमा ने भी परिवार का पेट पालने के लिए छोटे-मोटे काम किए। यह उस समय था जब उन्होंने 2012 में एक डिस्ट्रिक्ट मीट में रजत पदक जीतकर स्थानीय स्पर्धाओं में भाग लेना शुरू किया था।

अचिंता शुली का परिवार

पिता का नाम (Father’s name)जगत शुली
माता का नाम (Mother’s name)पूर्णिमा शुली
बहन का नाम (Sister’s name )आलोक शुली

अचिंता शुली का करियर

  • शुली को आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट के ट्रायल में चुना गया, जहां उन्होंने 2015 में दाखिला लिया। उनके बेहतरीन प्रदर्शन ने उन्हें उसी वर्ष भारतीय राष्ट्रीय शिविर में शामिल होने में मदद की। 
  • उन्होंने साल 2016 और 2017 में आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में अपनी ट्रेनिंग करनी जारी रखी उसके बाद साल 2018 में उन्होंने राष्ट्रीय शिविर में दाखिला लिया और अभी तक वही से अपनी वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिगं ले रहे हैं।
  • वह साल 2015 में सुर्खियों में आए, जब उन्होंने कॉमनवेल्थ यूथ चैंपियनशिप में 56 किग्रा स्पर्धा में रजत पदक जीता। वह बाद में 69 किग्रा स्पर्धा में चले गए और 2018 में एशियाई युवा चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
  • साल 2018 युवा भारोत्तोलक के लिए एक यादगार वर्ष साबित हुआ, जिसने जूनियर और सीनियर कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप 2018 में स्वर्ण पदक भी जीता।
  • साल 2019 में एसएएफ खेलों में विजयी होने के साथ ही एक और स्वर्ण पदक भी आया।
  • अचिंता ने उस समय 18 साल की उम्र में 2019 में सीनियर नेशनल में भी स्वर्ण पदक हासिल किया था।
  • COVID-19 महामारी लॉकडाउन के बाद, युवा खिलाड़ी ने 2021 में कॉमनवेल्थ सीनियर चैंपियनशिप के स्वर्ण पदक का दावा किया, उसी वर्ष जूनियर विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।

अचिंता शुली कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में 

भारोत्तोलक अचिंता शुली ने रविवार को यहां एनईसी हॉल में 313 किग्रा (143 किग्रा 170 किग्रा) भार उठाकर राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए तीसरा स्वर्ण पदक जीता ।

शुली के प्रतिद्वंदी, मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद और कनाडा के शाद डार्सिग्नी क्रमशः दूसरे और तीसरे सर्वश्रेष्ठ भारोत्तोलक के रूप में समाप्त हुए।

 मुहम्मद ने 303 किग्रा (138 किग्रा 165 किग्रा) उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि डार्सिग्नी ने कुल 298 किग्रा (135 किग्रा 163 किग्रा) भार उठाकर तीसरा स्थान हासिल किया।

भारत के स्वर्ण पदक विजेता भारोत्तोलक, शुली ने कल स्नैच वर्ग में तीन क्लीन लिफ्टों -137 किग्रा, 140 किग्रा और 143 किग्रा को अंजाम दिया है। 143 किग्रा के उनके तीसरे प्रयास ने उन्हें देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने में मदद की।

उन्होंने स्नैच कैटेगरी में रिकॉर्ड तोड़ 143 किग्रा और क्लीन एंड जर्क कैटेगरी में 160 किग्रा की लिफ्ट हासिल की थी, जिसने उन्हें 303 किग्रा की लिफ्ट दी, जो कॉमनवेल्थ गेम्स में एक रिकॉर्ड है। अपनी जीत के साथ, लालरिननुंगा ने सीडब्ल्यूजी 2022 में देश का पांचवां पदक और इस आयोजन में दूसरा स्वर्ण पदक जीता।

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अंतिम कुछ शब्द –

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