मोहम्मद गौरी का जीवन परिचय | Muhammad Ghori Biography ,Death

मोहम्मद गौरी का जीवन परिचय | Muhammad Ghori biography ,Death ,History in hindi

मोहम्मद गौरी का जीवन परिचय (जीवनी, जन्म तारीख, जन्म स्थान, शासन, धर्म, मृत्यु कैसे हुई, फ्लिम, इतिहास, भारतीय अभियान, मोहम्मद गौरी आक्रमण, हमला, पत्नी ) (Muhammad of Ghor Biography, history, death, dynasty, family, first attack, wife, date of birth, birth place, cast, religion, film, history, abhiyaan, attack, fight,)

मोहम्मद गौरी एक ऐसा नाम है जिसका नाम हर किसी व्यक्ति जिंदगी कभी ना कभी तो सुना ही होगा। असल में ज्यादातर लोग मोहम्मद गौरी का नाम भारतीय सम्राट पृथ्वीराज चौहान के साथ हुए तराइन की पहली एवं दूसरी लड़ाई की वजह से जानते होंगे।

मोहम्मद गौरी के बचपन का नाम शहाबुद्दीन था जिसे मुइज़ अल-दीन के नाम से भी जाना जाता था और घोर अफगानिस्तान में एक जगह है, इसलिए उन्हें घोर के मुहम्मद या मोहम्मद गोरी के नाम से भी जाना जाता है।

इतिहास में उन्हें घुरिद वंश के सबसे महान शासकों में से एक के रूप में जाना जाता है, वह पहले मुस्लिम शासक थे जिन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लामी साम्राज्य की नींव रखी, उन्होंने दुनिया के कई हिस्सों पर शासन किया जो आधुनिक दिनों में पाकिस्तान के रूप में जाने जाते हैं, उत्तर भारत, ईरान, बांग्लादेश, ताजिकिस्तान, अफगानिस्तान और तुर्कमेनिस्तान, इसलिए, वह मध्य एशिया में एक प्रसिद्ध शासक था।

ऐसे शासको के बारे में जानकारी होना बहुत जरुरी है तो आज के इस लेख में आपको मोहम्मद गौरी के इतिहास और उनकी लड़ाइयों के बारे में जानेंगे।

मोहम्मद गौरी का जीवन परिचय | Muhammad Ghori biography ,Death ,history in hindi
Muhammad Ghori biography in hindi

मोहम्मद गौरी का जीवन परिचय (Muhammad Ghori Biography)

Table of Contents

नाम (Name)मुइज़ुद्दीन मुहम्मद ग़ौरी
शासनावधि नाम (Reign name)सुल्तान शहाबुद्दीन मुहम्मद ग़ौरी
उपनाम (Nick Name )शिहाबुद्दीन  ,मोहम्मद गौरी ,गोर के मोहम्मद
जन्मदिन (Birthday)साल 1149 में
जन्म स्थान (Birth Place)गोर  , घुरिद साम्राज्य (वर्तमान 
अफगानिस्तान )
उम्र (Age ) वर्ष 56-57 (मृत्यु के समय )
मृत्यु की तारीख (Date of Death)15 मार्च 1206 
मृत्यु का स्थान (Place of Death )धमियाक , झेलम जिला ,घुरिद साम्राज्य 
(वर्तमान पाकिस्तान )
मृत्यु का कारण (Reason Of Death )हत्या कर दी गई थी
मकबरा (Tomb )धमियाक, झेलम जिला, वर्तमान पाकिस्तान
पिता का नाम (Father)बहालुद्दीन साम प्रथम
भाई का नाम (Brother )गयासुद्दीन मुहम्मद
वंश (Linage )घुरिद वंश 
धर्म (Religion)इस्लाम
पेशा (Occupation)अफगानी राजा , योद्धा
शासनकाल (Reign)1173–1202 (अपने भाई ग़ियासुद्दीन मुहम्मद के साथ);
1202–1206 (बतौर एकल शासक)
पराजय (Defeat)पृथ्वीराज चौहान से लगातार 17 बार
वैवाहिक स्थिति Marital Statusशादी के बारे में कोई लेख मौजूद नहीं

मोहम्मद गौरी का जन्म एवं प्रारंभिक जीवन

मोहम्मद गौरी का जन्म 1149 ईस्वी में वर्तमान अफगानिस्तान के घुर क्षेत्र में हुआ था। उनके जन्म की सही तारीख अज्ञात है। उनके पिता बहाउद्दीन प्रथम घुर के स्थानीय शासक थे। मोहम्मद गौरी के बड़े भाई गयासुद्दीन मुहम्मद थे ।

प्रारंभिक जीवन में, उनके चाचा अलाउद्दीन हुसैन ने उन दोनों को पकड़ लिया। लेकिन बाद में उनके चाचा अलाउद्दीन हुसैन बेटे सैफुद्दीन मुहम्मद ने उन्हें रिहा कर दिया .

साल 1183 में सैफुद्दीन मुहम्मद की मृत्यु के बाद, घुरीद अभिजात वर्ग ने मोहम्मद गौरी के बड़े भाई गयासुद्दीन का समर्थन किया और सत्ता हासिल करने में उनकी सहायता की। 

गयासुद्दीन ने फिर मुइज़ुद्दीन को इस्तियन और कज़ुरान का शासन दिया। मोहम्मद गौरी के बड़े भाई ने अपने भाई गयासुद्दीन को कई गोरी नेताओं को हराने में मदद की, जो सिंहासन के लिए होड़ में थे।

मुहम्मद गोरी का युद्ध अभियान

मुहम्मद गोरी के बड़े भाई गयासुद्दीन को अपने चाचा फखरुद्दीन मसूदके के अंदर सत्ता की लालसा दिखाई दी ,जिन्होंने खुद के लिए सिंहासन का दावा किया था और हेरात के सेल्जूक गवर्नर तदज अल-दीन यिल्दिज़ और बल्ख के साथ गठबंधन किया था ।

गयासुद्दीन ने मुहम्मद गोरी की सूझ बुझ से हेरात और बल्ख के सेल्जुक गवर्नर ताजुद्दीन इल्दिज़ की सेना को राग-ए-जार नामक स्थान पर हराया। 

युद्ध के दौरान सेल्जुक गवर्नर मारा गया और इस लड़ाई में गयासुद्दीन की जीत हुई और गयासुद्दीन ने सबसे पहले मुहम्मद गोरी को छुड़ाया जो उसके चाचा अलाउद्दीन हुसैन ने बंदी बनाया हुआ था।

इस लड़ाई की वजह से गयासुद्दीन और मुहम्मद गोरी ने जमींदार, बगिया और गुज्जन पर विजय प्राप्त की और गयासुद्दीन ने मुहम्मद गोरी को बामियान (अफगानिस्तान में ) के शासक के रूप में बहाल किया 

वर्ष 1173 , यह वर्ष मुहम्मद भाइयों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था क्योंकि उन्होंने अफगानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया और गजनी राजवंश पर आक्रमण किया, और ओघुज तुर्क को हराया , ओघुज ने गजनविद शहर पर कब्जा कर लिया था। मुहम्मद गोरी के बड़े भाई गयासुद्दीन को गजनी का शासक नियुक्य किया गया।

वर्ष 1175 में, मुहम्मद भाइयों ने बहा अल-दीन तोगरिल नामक सेल्जुक गवर्नर से हेरात नामक स्थान पर विजय प्राप्त की और पुसांग (अफगानिस्तान में एक शहर ) को जीतने में कामयाब रहे।

मोहम्मद गौर की किससे हुई शादी

इतिहास के पन्नो में ऐसा कहा जाता है कि, मोहम्मद गौरी ने अपनी जिंदगी में कभी शादी नहीं की। लेकिन यह बात कहा तक सच है इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। उनकी हत्या करने के बाद उनकी गद्दी पर बैठने के लिए उनकी खुद की कोई संतान या वारिस नहीं था इस बारे में जरूर इतिहास में लिखा गया है।

भारत के लिए मुहम्मद गोरी के इरादे

अफगानिस्तान पर विजय प्राप्त करने के बाद उसने सोचा कि अब हमें भारत पर आक्रमण करना चाहिए तो हम भारत की संपत्ति पर कब्जा कर लेंगे लेकिन धीरे-धीरे वह सोचने लगा कि मैं भारत में एक साम्राज्य स्थापित कर सकता हूं।

भारत पर हमला करने के सबसे महत्वपूर्ण कारणों में से एक यह था कि ख्वारज़्मियन साम्राज्य बढ़ रहा था जो एक महान और शक्तिशाली फ़ारसी साम्राज्य था, और वह जानता था कि अगर उसने कुछ नहीं किया तो ख्वारज़्मियन साम्राज्य घुरिद साम्राज्य को बर्बाद कर देगा।

वर्ष 1175 में, वह खैबर दर्रे से भारत आया और पंजाब क्षेत्र, मुल्तान पर हमला करना शुरू कर दिया।

वर्ष 1176 में, उसने ऊपरी सिंध में उच पर अधिकार कर लिया।

वर्ष 1178 में, उसने गुजरात पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन मुहम्मद वह कायदरा की लड़ाई में चालुक्य (सोलंकी) के मूलराज द्वितीय से हार गया, मुहम्मद ने हार से सबक लिया।

वह पर्याप्त कमांडर नहीं था लेकिन उसकी पसंद अद्भुत थी वह अच्छी तरह से जानता था कि उसे किसी भी अभियान के लिए कौन सा कमांडर और अधिकारी चुनना चाहिए, कुल मिलाकर वह एक अच्छा रणनीति निर्माता था।

तराइन का प्रथम युद्ध (1191)

उसने तराइन पर आक्रमण करने की पूरी रणनीति बनाई लेकिन आक्रमण करने से पहले उसने पृथ्वीराज चौहान को कूटनीति के माध्यम से मोड़ने की कोशिश की लेकिन वह असफल रहा।

फिर 1191 में तराइन का पहला युद्ध शुरू हुआ जिसमें मोहम्मद गौरी को पृथ्वीराज चौहान ने पराजित किया क्योंकि पृथ्वीराज चौहान के पास गोरी की तुलना में बहुत बड़ी सेना थी।

उस युद्ध में, पृथ्वीराज चौहान के बेटे  गोविंद राज ने वास्तव में अच्छी भूमिका निभाई थी कि वह उसे मारने वाला था लेकिन पृथ्वीराज चौहान ने उसे मारने नहीं दिया।

वह एक चतुर व्यक्ति था वह अपने स्थान पर वापस चला गया और तराइन की दूसरी लड़ाई के लिए फिर से एक और रणनीति बनाने लगा और उसने अपनी पिछली सभी गलतियों से बहुत कुछ सीखा जो उसने पहली लड़ाई में की थी।

उसके बाद उन्होंने पृथ्वीराज चौहान को पत्र भेजकर कहा कि ‘यह आपके लिए अच्छा है यदि आप आत्मसमर्पण करते हैं’ पृथ्वीराज चौहान को विश्वास नहीं हो रहा था।

तराइन का दूसरा युद्ध (1192)

पृथ्वीराज चौहान के पास एक बड़ी सेना थी और वहां 3000 हाथी, 300000 घुड़सवार और पैदल सेना थी।

जबकि गौरी के पास मात्र 120000 पूरी तरह से प्रशिक्षित आदमी थे।

पृथ्वीराज चौहान जानते थे कि गोरी की सेना उसकी सेना का सामना नहीं कर सकती।

रणनीति – तराइन की पहली लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान की सेना के सामने से गोरी पर हमला हुआ और वह उससे हार गया।

तराइन के दूसरे युद्ध के लिए उसने एक रणनीति बनाई उसने अपनी सेना को पाँच भागों में बाँट दिया, उसने कहा कि हम चारों तरफ से हमला करेंगे और पाँचवाँ डिवीजन आरक्षित रहेगा।

फिर उसने पृथ्वीराज चौहान की सेना पर चारों ओर से हमला करना शुरू कर दिया लेकिन फिर से पृथ्वीराज चौहान सेना उसकी सेना पर हावी हो रही थी।

गौरी ने अपनी सेना को भागने की आज्ञा दी तो पृथ्वीराज चौहान ने सोचा कि वे उससे डरते हैं और वे उससे दूर भाग रहे हैं लेकिन यह एक रणनीति थी।

गौरी की सेना को भागता देख पृथ्वीराज चौहान ने अपनी सेना को आज्ञा दी, उसका पीछा किया, और जब उसकी सेना पीछा कर रही थी, घोर ने अपने पांचवें डिवीजन पर हमला करने की आज्ञा दी।

उनके 5वें डिवीजन ने पृथ्वीराज चौहान को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे पृथ्वीराज चौहान को हार का सामना करना पड़ा।

मोहम्मद गौरी ने भारत पर कितनी बार आक्रमण किया और किससे लिया बदला

  • मोहम्मद गौरी ने भारत पर आक्रमण करने लिए पहले सिंधु और मुल्तान दोनों पर विजय प्राप्त की थी।
  • उसके बाद उसने लाहौर और पंजाब को जीत लिया था।
  • उन्होंने पृथ्वीराज चौहान को हराने के लिए 18 बार लड़ाई की थी जिसमे से उसे 17 बार हार का सामना करना पड़ा था।
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने 1192 में अपनी 18वी लड़ाई और तराइन के दूसरे युद्ध में पृथ्वीराज चौहान को हराया था और अपनी सभी 17 हारो का बदला लिया।
  • वह भारत में इस्लामी साम्राज्य की नींव रखने में सफल रहा।
  • उसने कन्नौज के जयचंद को हराकर चीनी मिट्टी के बरतन की लड़ाई जीती।

मोहम्मद गौरी ने किस राजा के साथ की गद्दारी

मोहम्मद गौरी को भारत में पूरी तरह से अपने साम्राज्य को खड़ा करने के लिए पृथ्वीराज चौहान को हराना बहुत जरुरी था लेकिन पृथ्वीराज से लगातार 17 लड़ाईयों में मुँह की खाने के बाद भी उसने भारत पर कब्ज़ा करने की नियत नहीं बदली।

इस बार उन्होंने चंदावर शासनकाल में कन्नौज के जयचंद को अपने साथ मिला लिया और उनसे पृथ्वीराज चौहान के बारे गुप्त बातें पता की और उन्हें पता चला की चौहान कभी भी शाम होने के बाद लड़ाई नहीं किया करते थे जो नियम थे।

गौरी को ऐसे ही मौके की तलाश थी और बस इसी बात का फायदा उठाकर और अपने साथ मित्र चंदावर शासनकाल में कन्नौज के जयचंद के साथ मिलकर पृथ्वीराज चौहान को हरा दिया था। उसके बाद उनके साथी मित्र के साथ उन्होंने दगा कर दिया और कन्नौज के जयचंद (जिन्होंने गौरी को पृथ्वीराज चौहान को हराने में साथ दिया था ) के साथ ही युद्द छेड़ दिया और उनको मार दिया। इस युद्द को चंदावरी की लड़ाई का नाम दिया गया।

चंदावरी की लड़ाई

वर्ष 1193 या 1194 में, उन्होंने चंदावर शासनकाल में कन्नौज के जयचंद पर हमला किया जो अब फिरोजाबाद के पास स्थित है।

उस लड़ाई में, उसने जयचंद को हराया, उसे हराकर मुहम्मद घोर ने आगरा और उत्तरी भारत के अन्य हिस्सों पर अधिकार कर लिया। 

इसके बाद  दिल्ली सल्तनत  अस्तित्व में आई जिसने अगले 600 वर्षों तक शासन किया  कुतुबुद्दीन ऐबक  उसका सबसे महत्वपूर्ण दास था और दिल्ली सल्तनत का पहला शासक बन गया और  गुलाम वंश की नींव रखी।

मुहम्मद गोरी का व्यक्तित्व

वह महमूद गजनी की तरह सहनशील नहीं था। तराइन की दूसरी लड़ाई जीतने के बाद घोर के मुहम्मद ने पृथ्वीराज चौहान के रिश्तेदारों को पृथ्वीराज चौहान का राज्य लौटा दिया और कहा कि आज से तुम मेरे नियंत्रण में काम करोगे

तराइन की दूसरी लड़ाई जीतने के बाद अगर वह चाहता तो सभी राजपूतों को मार सकता था लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया, क्योंकि वह जानता था कि कूटनीति बहुत अच्छी चीज है और उसे भारत में भी रहना है।

कैसे हुई मोहम्मद गौरी की मौत (Muhammad Ghori Death Cause)

वर्ष 1206 में 15 मार्च को जब वह अपने अफगानिस्तान के गजनी शासन में वापस जा रहा था, उसका कारवां झेलम नदी के पास विश्राम किया, और हिंदू खोकरों के एक छोटे से समूह द्वारा शाम की प्रार्थना के समय उनकी हत्या कर दी गई थी।

हत्यारे ने उन्हें इतनी बेरहमी से मार डाला कि उनके शरीर पर 22 घाव थे। उनकी इच्छा के अनुसार, गौरी को वहीं दफनाया गया, जहां वे गिरे थे।

पृथ्वीराज चौहान की फिल्म में दिखाई देंगे मोहम्मद गौरी

पृथ्वीराज यश राज फिल्म्स के तहत आदित्य चोपड़ा द्वारा निर्मित एक भारतीय हिंदी भाषा  फिल्म है । यह फिल्म राजा पृथ्वीराज चौहान के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है और इसमें अक्षय कुमार चौहान की मुख्य भूमिका में हैं, वही मोहम्मद गौरी की भूमिका निभाने के लिए संजय दत्त को चुना गया है।  यह फिल्म 3 जून 2022 को रिलीज होने वाली है।

FAQ

मोहम्मद गौरी को किसने और कब मारा?

वर्ष 1206 में 15 मार्च को जब वह अपने अफगानिस्तान के गजनी शासन में वापस जा रहा था, उसका कारवां झेलम नदी के पास विश्राम किया, और हिंदू खोकरों के एक छोटे से समूह द्वारा शाम की प्रार्थना के समय उनकी हत्या कर दी गई थी।

पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच कितनी बार युद्ध हुआ?

 18 बार

मोहम्मद गौरी ने भारत पर क्यों किया आक्रमण?

भारत उस समय अमीर देश था और देश को लूटने के लिए उन्होंने भारत पर हमला किया था।

मोहम्मद गौरी की कब हुई मृत्यृ?

मोहम्मद गौरी की मृत्यृ 15 मार्च 1206 को   धमियाक , झेलम जिला ,घुरिद साम्राज्य 
(वर्तमान पाकिस्तान ) में हुई थी।

मोहम्मद गौरी के बाद किसने संभाला शासन?

कुतुबुद्धीन ऐबक

मोहम्मद गौरी का पूरा नाम क्या है?

मुइज़ुद्दीन मुहम्मद ग़ौरी

मोहम्मद गोरी कौन से वंश का था?

घुरिद वंश 

मोहम्मद गौरी को पराजित करने वाला भारत का पहला शासक कौन था?

भारत में पहली बार मोहम्मद गौरी को पराजित करने वाला भारत का पहला शासक का नाम पृथ्वीराज चौहान था।

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अंतिम कुछ शब्द –

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