सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जीवनी | Suryakant Tripathi Nira

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जीवनी | Suryakant Tripathi Nirala Biography in Hindi

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय ,पहली कविता , पत्नी का नाम ,रचनाएं ,देहांत ,अंतिम काव्य, बचपन का नाम ,कविताओं का संग्रह(Suryakant Tripathi Nirala Biography , Death in Hindi )

सूर्यकांत त्रिपाठी हिन्दी के प्रसिद्ध कवि थे। उन्हें “निराला” के नाम से जाना जाता था। हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें 1955 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था । 

उनके नाम पर सूर्यकांत त्रिपाठी निराला राष्ट्रीय समिति नामक एक नए शोध संस्थान का नाम रखा गया है।

सूर्यकांत त्रिपाठी ने निबंध, उपन्यास, कविता और कहानियों के माध्यम से अपने विचारों को लिखने के लिए हिंदी भाषा को चुना। 

त्रिपाठी साहित्यिक छायावाद के चार मुख्य स्तंभों में से एक थे अर्थात् वे हिन्दी साहित्य के छाया युग के महत्वपूर्ण कवि थे । वह एक लेखक, कहानीकार, कवि, उपन्यासकार, निबंधकार और संपादक थे। उन्होंने कई स्केच भी बनाए। त्रिपाठी को प्रगतिवादी, प्रयोगवाद और नई कविताओं का जनक माना जाता है।

बहुत कम उम्र में निराला हिंदी, बंगाली, संस्कृत और अंग्रेजी भाषाओं के विशेषज्ञ बन गए, जिनमें से अधिकांश में उन्हें घर बैठे ही महारत हासिल करनी थी। 

कविताओं, निबंधों और कहानियों को हिंदी में लिखने के अलावा, वह एक चित्रकार के रूप में अपने कौशल के लिए भी जाने जाते थे।

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जीवनी | Suryakant Tripathi Nirala Biography in Hindi
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जीवनी

Table of Contents

नाम (Name )सूर्यकांत त्रिपाठी 
अन्य नाम (Other Name )निराला
जन्म तारीख (Date of birth)21 फरवरी, 1897
जन्म स्थान (Place of born )मिदनापुर, बंगाल, ब्रिटिश भारत
मृत्यु तिथि (Date of Death )15 अक्टूबर, 1961
मृत्यु का स्थान (Place of Death)इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
मृत्यु का कारण (Death Cause)शरीर की कई बीमारियाँ
उम्र( Age)64 वर्ष (मृत्यु के समय )
स्कूल (School )महिषादल राज हाई स्कूल 
महिषादल ,
गृहनगर (Hometown )मिदनापुर, बंगाल, ब्रिटिश भारत
पेशा (Profession)  लेखक, कवि, निबंधकार
उपन्यासकार
भाषा (Language)हिंदी
धर्म (Religion) हिन्दू
आँखों का रंग (Eye Color)काला
बालो का रंग (Hair Color )काला
नागरिकता(Nationality)भारतीय
वैवाहिक स्थिति (Marital Status)  विवाहिक

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म कब हुआ था?

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म 21 फरवरी, 1896 को बंगाल के मिदनापुर जिले में बसे एक रूढ़िवादी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। 

सूर्यकांत त्रिपाठी के माता-पिता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव क्षेत्र के थे, लेकिन काफी लंबे समय तक बंगाल में बसे रहे। सूर्यकांत त्रिपाठी के पिता पंडित रामसहाय त्रिपाठी स्वभाव से बहुत सख्त व्यक्ति थे और अपने पूरे परिवार को अपने नियंत्रण में रखना पसंद करते थे। 

वह पेशे से एक सरकारी कर्मचारी थे और वह जो पैसा कमाते थे वह अक्सर पूरे परिवार के अस्तित्व के लिए आवश्यक राशि से कम होता था। अतः यह कहना गलत नहीं होगा कि सूर्यकांत त्रिपाठी भी अपने जीवनकाल में गरीबी का अर्थ जानते थे। 

पंडित रामसहाय त्रिपाठी के आग्रह पर ही त्रिपाठी ने एक बंगाली माध्यम के स्कूल में दाखिला लिया। लेकिन यह संस्कृत भाषा थी जो उन्हें सबसे ज्यादा दिलचस्पी थी और वे अक्सर संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी में किताबें पढ़ते थे।

सूर्यकांत त्रिपाठी की माँ की मृत्यु तब हो गई थी जब वह अभी भी बहुत छोटे थे, उन्हें अपने अत्याचारी पिता से निपटने के लिए अकेला छोड़ दिया।

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की शिक्षा

उनकी प्रारंभिक शिक्षा मेदिनीपुर के महिषादल गांव के महिषादल राज हाई स्कूल से बंगाली माध्यम से हुई। उन्होंने हाई स्कूल की परीक्षा पास की, जिसके बाद उन्होंने घर पर ही संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी साहित्य का अध्ययन किया । 

 कुछ वर्षों के बाद सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ पढ़ाई और काम जारी रखने के लिए बंगाल से अपने पूर्वजों के मूल उत्तर प्रदेश में स्थानांतरित हो गए। निराला पहले लखनऊ और फिर यूपी के उन्नाव जिले के गढ़कोला गांव में बसे। 

रिपोर्टों का दावा है कि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ स्वभाव से विद्रोही थे। उन्होंने समाज के निर्धारित पैटर्न को स्वीकार नहीं किया और हमेशा सीखने और अभ्यास के नए क्षेत्रों में कदम रखा।

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की शादी

  • पंद्रह साल की उम्र में उनका विवाह मनोहरा देवी से हो गया। लेकिन जब वह 22 साल के थे तब उनकी पत्नी की भी मृत्यु हो गई।
  • सूर्यकांत त्रिपाठी निरालाजी की शादी 15 साल की उम्र में हुई थी। निराला की शादी एक पंडित परिवार की बेटी से हुई थी। निराला की पत्नी का नाम मनोहरा देवी था।
  • त्रिपाठी की पत्नी मनोहरा देवी एक सुंदर और शिक्षित महिला थीं। सूर्यकांत त्रिपाठी की पत्नी की संगीत में बहुत गहरी रुचि है।
  • निराला की पत्नी मनोहरा देवी ने उन्हें हिंदी सिखाई। उसके बाद, त्रिपाठी ने हिंदी में अपनी रचनाएँ लिखना शुरू किया। त्रिपाठी ने शादी के बाद बहुत खुशी से अपना जीवन व्यतीत करना शुरू कर दिया। 
  • लेकिन उसकी खुशी जल्दी ही छीन ली गई, क्योंकि जब वह 22 साल के थे, तब उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई और बाद में उनकी विधवा बेटी भी मर गई। 
  • साल 1918 के स्पैनिश फ्लू इन्फ्लूएंजा के प्रकोप में निराला ने अपनी पत्नी और बेटी सहित अपने परिवार के आधे लोगों को खो दिया।

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का करियर

  • सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ ने पहली बार 1918 में महिषादल राज्य में नौकरी की, जहाँ उन्होंने 1922 तक काम किया। उन्होंने 1918 से 1922 तक सेवा की।
  • फिर स्वतंत्र लेखन की ओर और फिर अनुवाद कार्य की ओर बढ़े। उन्होंने 1922 से 1923 तक कोलकाता से प्रकाशित ‘समन्वय’ का संपादन किया।
  • फिर उन्हें लखनऊ में गंगा बुक गारलैंड कार्यालय में तैनात किया गया, जहां वे 1935 के मध्य तक कंपनी की मासिक पत्रिका “सुधा” से जुड़े रहे। 
  • उन्होंने 1935 से 1940 तक लखनऊ में कुछ समय बिताया । उसके बाद, वे 1942 से अपनी मृत्यु तक इलाहाबाद में रहे और स्वतंत्र लेखन और अनुवाद में काम किया। 
  • उनकी पहली कविता, ‘जन्मभूमि प्रभा’,जून 1920 में प्रकाशित हुआ। अक्टूबर 1920 में, मासिक पत्रिका सरस्वती प्रकाशित हुई।
  • अपने समकालीनों के अन्य कवियों के विपरीत, उन्होंने कविता में कल्पना का सहारा लिया है और वास्तविकता को महत्वपूर्ण रूप से चित्रित किया है।
  •  निराला की कई कविताओं का अनुवाद डेविड रुबिन ने किया था। निराला: आत्माहंत आस्था दूधनाथ सिंह द्वारा लिखित उनकी रचनाओं का आलोचनात्मक विश्लेषण थी ।

सूर्यकांत त्रिपाठी का साहित्यिक जीवन और काव्य कैरियर

  • सूर्यकांत त्रिपाठी एक हिंदी लेखक हैं, जिन्होंने एक दर्जन से अधिक फिक्शन और नॉनफिक्शन किताबें लिखी हैं।
  •  उनके काम का कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है, और उन्होंने साहित्य अकादमी पुरस्कार, व्यास सम्मान और भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार सहित कई पुरस्कार जीते हैं। 
  • त्रिपाठी की काल्पनिक कहानी भारत के ग्रामीणों के दैनिक जीवन में निहित है। उनका नॉनफिक्शन अक्सर आधुनिक दुनिया के साथ भारतीय संस्कृति और इतिहास के मिलन की पड़ताल करता है।
  • निराला ने हिंदी में कई कविताएँ, लेख, उपन्यास और कहानियाँ लिखीं और उनकी पहली कविता ‘जन्मभूमि’ 1920 में उस समय की पत्रिका “प्रभा” में प्रकाशित हुई थी।
  • फिर, 1923 में, पहला कविता संग्रह ‘अनामिका’ और पहला लेख ‘ बंगाली भाषा के उच्चारण’ मासिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होते थे। 
  • उन्होंने अपने समकालीन कवियों के अलावा अन्य कविताओं में कल्पना का सहारा लिया है और वास्तविकता को गंभीरता से चित्रित किया है।
  • उनकी कविताओं में रहस्यवाद, नस्ल के प्रति प्रेम, प्रकृति के प्रति प्रेम, नस्लीय मतभेदों के खिलाफ विद्रोह, दलितों और गरीबों के लिए सहानुभूति और पाखंड और प्रदर्शन के लिए कटाक्ष को दर्शाया गया है। 
  • उन्होंने अपनी रचनाओं में हिंदी की बोली पर जोर दिया। उनकी कविता की भाषा, शैली में पाई जाने वाली एकता उनकी कविता की मुख्य विशेषताएं हैं। 
  • सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने अपनी कविताओं में शायद ही कभी काल्पनिक घटनाओं को समाहित किया हो, वे अपनी कविताओं में सत्य के महत्व को दर्शाते हैं।

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का निधन

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ ने अपने जीवनकाल में जितने भी दुर्भाग्य का सामना किया था, निश्चित रूप से उनके अतीत के बाद भी उन्हें बहुत परेशान किया, एक घातक बीमारी में परिणत हुआ जो अंततः वर्ष 1961 में उनकी मृत्यु का कारण बने।

सूर्यकांत त्रिपाठी इस दौरान सिज़ोफ्रेनिया का शिकार थे। उनके जीवन के बाद के चरण और 15 अक्टूबर, 1961 को उनकी मृत्यु हो गई।

उन्होंने अपने पीछे हिंदी साहित्य में काम का एक संग्रह छोड़ दिया, जिसे आज भी वर्तमान पीढ़ी द्वारा मनाया और सराहा जाता है।

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का काव्य संग्रह

  • अनामिका
  • परिमल
  • गीतिका
  • द्वितीय अनामिका
  • कुकुरमुत्ता
  • अणिमा
  • बेला
  • नए पत्ते
  • अर्चना
  • आराधना
  • गीत कुंज
  • सांध्य काकली
  • अपरा
  • दो शरण
  • रागविराग

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की शायरी संग्रह

  • सरोज स्मृति
  • सबसे अच्छा
  • वह जाग गया
  • गीतिका
  • कुकुरमुत्ता

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की लम्बी रचनाएँ

  • राम की शक्ति पूजा
  • सरोज स्मृति
  • बादल राग
  • तुलसीदास

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की प्रतिनिधि रचनाएँ

  • हमारा कालेज का बचुआ
  • दीन
  • मुक्ति
  • राजे ने अपनी रखवाली की
  • भिक्षुक
  • मौन
  • राजे ने अपनी रखवाली की
  • संध्या सुन्दरी
  • तुम हमारे हो
  • वर दे वीणावादिनी वर दे !
  • चुम्बन
  • प्राप्ति
  • भारती वन्दना
  • भर देते हो
  • ध्वनि
  • उक्ति
  • गहन है यह अंधकारा
  • शरण में जन, जननि
  • स्नेह-निर्झर बह गया है
  • मरा हूँ हज़ार मरण
  • पथ आंगन पर रखकर आई
  • आज प्रथम गाई पिक
  • मद भरे ये नलिन
  • भेद कुल खुल जाए
  • प्रिय यामिनी जागी
  • लू के झोंकों झुलसे हुए थे जो
  • पत्रोत्कंठित जीवन का विष
  • तोड़ती पत्थर
  • खुला आसमान
  • बाँधो न नाव इस ठाँव, बंधु
  • प्रियतम
  • वन बेला
  • टूटें सकल बन्ध
  • रँग गई पग-पग धन्य धरा
  • भिक्षुक
  • वे किसान की नयी बहू की आँखें
  • तुम और मैं
  • उत्साह
  • अध्यात्म फल (जब कड़ी मारें पड़ीं)
  • अट नहीं रही है
  • गीत गाने दो मुझे
  • प्रपात के प्रति
  • आज प्रथम गाई पिक पंचम
  • गर्म पकौड़ी
  • दलित जन पर करो करुणा
  • कुत्ता भौंकने लगा
  • मातृ वंदना
  • बापू, तुम मुर्गी खाते यदि…
  • नयनों के डोरे लाल-गुलाल भरे
  • मार दी तुझे पिचकारी
  • ख़ून की होली जो खेली
  • खेलूँगी कभी न होली
  • केशर की कलि की पिचकारी
  • अभी न होगा मेरा अन्त
  • जागो फिर एक बार “

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ के गद्य संग्रह

  • बिलेसुर बकरीहा
  • कुलीभाटी

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का कहानी संग्रह

  • लिली
  • देवी
  • सुकुल की बीवीसखी
  • चतुरी चमारी

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का निबंध संग्रह

  • प्रबंध-परिचय
  • बंगभाषा का उच्चचरण
  • रवींद्र-कविता-कन्नन
  • प्रबंध-प्रतिमा
  • चाबुक
  • चयन
  • संग्रह

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला के उपन्यास

  • अप्सरा
  • अलका
  • प्रभावती
  • निरुपमा
  • चमेली
  • चोटी की पकड़
  • इंदुलेखा
  • काले करनामे

FAQ

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म कब और कहां हुआ था?

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म 21 फरवरी 1899, महिषादल, जिला मेदनीपुर (पश्चिम बंगाल) में हुआ था।

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने सबसे पहली पत्रिका का संपादन कब किया था?

वर्ष 1920 में 

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के द्वारा संपादित की गई मासिक पत्रिका कौन सी थी?

सरस्वती पत्रिका

निराला की अन्तिम कविता कौन सी है?

 साल 1969 को उन्होंने अपनी अंतिम काव्य संग्रह संध्याकाकली की रचना की थी

निराला जी की पहली कविता कौन सी है?

पहली कविता ‘जन्मभूमि’ का प्रभा नामक मासिक पत्र प्रशासन हुआ।

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की मृत्यु कब हुई थी?

15 अक्टूबर 1961

यह भी जानें :-

अंतिम कुछ शब्द –

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