ध्यानचंद का जीवन परिचय,पुरस्कार 2021। Dhyan Chand Biography

ध्यानचंद का जीवन परिचय,पुरस्कार 2021। Dhyan chand Hockey Player Biography in Hindi

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ध्यानचंद जो हॉकी के महान खिलाड़ियों में से एक है.ध्यान चंद को अब तक के सबसे महान हॉकी खिलाड़ियों में से एक माना जाता है।विश्व स्थर पर दशकों तक भारत का हॉकी पर दबदबा रहा और ओलंपिक में वे अजेय रहे।

ध्यान चंद ने 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई थी।

मेजर ध्यानचंद को हॉकी के जादूगर या जादूगर के नाम से भी जाना जाता था। यह खिलाड़ी 1928 के एम्सटर्डम ओलम्पिक में गोल करने वाले प्रमुख खिलाड़ी थे। मेजर ध्यानचंद ने हॉकी के एक मैच के दौरान 14 गोल कर दिए थे और उनके द्वारा किये गए इन गोलों की वजह से इन्हे ‘हॉकी के जादूगर’ के नाम से जाना जाता है ।

मेजर ध्यानचंद ने अपने अन्तराष्ट्रीय हॉकी खेल में लगभग 400 गोल दागे थे.साल 2021 में जापान में आयोजित होने टोक्यो ओलम्पिक 2020 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जी ने भारत का सबसे उच्च खेल पुरस्कार ,राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर ‘मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवार्ड’ कर दिया गया है।

ध्यानचंद

ध्यानचंद का जीवन परिचय ( Dhyan Chand Biography)

Table of Contents

नाम ( Name)ध्यानचंद
असली नाम (Other Name )ध्यान सिंह
निक नेम (Nick Name )द विज़ार्ड, हॉकी विज़ार्ड, चाँद, हॉकी का जादूगर
पेशा (Profession)भारतीय हॉकी खिलाड़ी
प्रसिद्धी का कारण (Famous For )विश्व के सबसे अच्छे हॉकी खिलाड़ी
जन्म (Birth)29 अगस्त 1905
उम्र (Age )74 साल
जन्म स्थान (Birth Place)इलाहबाद, उत्तरप्रदेश
मृत्यु की तारीख (Date of Death) 3 दिसम्बर 1979
मृत्यु की जगह (Place of Death) दिल्ली, भारत
मृत्यु की वजह (Reason of Death ) लिवर कैंसर
गृहनगर (Hometown)झांसी, उत्तरप्रदेश, भारत
शिक्षा Education Qualification 6वी कक्षा पास
राष्ट्रीयता (Nationality)भारतीय
धर्म (Religion)हिन्दू
जाति (Caste )राजपूत
कद (Height)5 फीट 7 इंच
वजन (Weight)70 किलोग्राम
अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू (International Debut) न्यूज़ीलैंड दौरा साल 1926 में
अंतिम मैच (Last Match )साल 1948 में
घरेलू / राज्य टीम (Domestic Team) झाँसी हीरोज
मैदान में व्यवहार (Nature on field)एनर्जेटिक
कोच (Coach )सूबेदार – मेजर भोले तिवारी (पहले मेंटर)
पंकज गुप्ता (पहला कोच)
पसंदीदा मैच (Favourite Match )साल 1933 में खेला गया कलकत्ता कस्टम और झांसी हीरो के बीच बीटन कप फाइनल
सर्विस / ब्रांच ( Army Service/Branch)ब्रिटिश इंडियन आर्मी एवं इंडियन आर्मी
सर्विस ईयर (Service-Years)सन 1921 – सन 1956
यूनिट (Unit)पंजाब रेजिमेंट
ज्वाइन्ड आर्मी (Joined Army As)सिपोय (सन 1922)
रिटायर्ड (Retired As)मेजर (सन 1956)
वैवाहिक स्थिति (Marital Status)  विवाहित
शादी की तारीख (Marriage Date )साल 1936 में

ध्यानचंद का शुरुवाती करियर (Dhyan Chand Early Life )

ध्यानचंद जी का जन्म 29 अगस्त 1905 को पिता सूबेदार समेश्वर दत्त सिंह एवं माँ शारदा सिंह के यहाँ उत्तरप्रदेश के शहर इलाहबाद में हुआ था।

मेजर ध्यानचंद एक राजपूत परिवार से ताल्लुक रखते थे। ध्यान चंद के दो भाई थे -हवलदार मूल सिंह एवं हॉकी खिलाडी रूप सिंह।इनके पिता ब्रिटिश भारतीय सेना में सिपाही थे और भारतीय सेना में रहते हुए उन्होंने सेना के लिए हॉकी खेली।

ध्यानचंद्र का परिवार ( Dhyan Chand Family)

पिता का नाम (Father’s Name)सूबेदार समेश्वर दत्त सिंह (आर्मी में सूबेदार)
माता का नाम (Mother’s Name)शारदा सिंह
भाई का नाम (Brother’s Name)हवलदार मूल सिंह एवं हॉकी खिलाडी रूप सिंह
पत्नी का नाम (Wife’s Name) जानकी देवी
बच्चो के नाम (Children’s Name) बृजमोहन सिंह, सोहन सिंह, राजकुमार, अशोक कुमार, उमेश कुमार, देवेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह

ध्यानचंद की शिक्षा (Dhyan Chand Education)

मेजर ध्यानचंद के पिता का बार बार सेना की नौकरी में ट्रांसफर होने के कारण ध्यानचंद अपनी पढ़ाई पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दे पाए और कक्षा 6वी तक की पढ़ाई पूरी कर पाए बाद इनका परिवार उत्तरप्रदेश के शहर झाँसी में बस गया।

ध्यानचंद हॉकी करियर ( Dhyan Chand Hockey Career )

ध्यानचंद जिन्हे मेजर ध्यानचंद के नाम से भी जाना जाता है इन्होने अपने जीवन में हॉकी कब से खेलना शुरू किया और हॉकी कब तक खेली इस बारे जानकारी देंगे।

ध्यानचंद के हॉकी खेल की शुरुआत( Dhyan chand Introduction to Hockey )

इनको शुरुआत से हॉकी के खेल में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी इनका मनपसंद खेल कुश्ती हुआ करता था।

 उन्होंने अपने शुरूआती दिनों में अपने दोस्तों के साथ हॉकी खेलना शुरू किया जो खुद पेड़ की शाखाओं से हॉकी स्टिक और फटे कपड़ों से गेंदें बनाते थे। 14 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता के साथ भारतीय सैनिको का एक हॉकी मैच देखने गए, जहां एक टीम 2 गोल से हार रही थी । 

उन्होंने अपने पिता से हारने वाली टीम की तरफ से खेलने के लिए अनुमति मांगी तब उनके पिता ने इस बात के लिए हामी भर दी. और ध्यान चंद ने हार रही टीम की तरफ से खेलते हुए टीम के लिए 4 गोल किए। 

सैनिको के बीच हो रहे इस मुकाबले को सेना के बड़े बड़े अफसर भी देख रहे थे जो इनके हॉकी के खेल से बहुत प्रभावित हुए।

उनके कौशल से प्रभावित होकर एक बड़े अधिकारी ने उन्हें सेना में शामिल होने की पेशकश की और 16 साल की उम्र में ध्यान को वर्ष 1922 में एक सिपाही के रूप में पंजाब रेजिमेंट में शामिल किया गया।

ध्यानचंद्र
सूबेदार-मेजर भोले तिवारी

ब्राह्मण रेजिमेंट के सूबेदार-मेजर भोले तिवारी जो खुद भी एक हॉकी के खिलाडी थे ,ध्यान चंद ने उनसे हॉकी खेल के बारे में बहुत कुछ जाना और उनसे हॉकी के खेल की मूल बातें सीखी ।

 पंकज गुप्ता ध्यान सिंह के पहले कोच थे जिन्होंने भविष्यवाणी की थी कि वह एक दिन चंद्रमा की तरह चमकेंगे, चांद को हिंदी में कहते हैं। इसलिए, ध्यान सिंह को उसके बाद ध्यान चंद के नाम से जाना जाने लगा।

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ध्यानचंद के पेशावर हॉकी खिलाडी के रूप में शुरुआत(Professional Career )

साल 1925 में मेजर ध्यान चंद ने अपना पहला नेशनल होकी टूर्नामेंट खेला था इस प्रतियोगिता में उत्तरप्रदेश, पंजाब, बंगाल, राजपुताना और मध्य भारत की हॉकी टीमों ने हिस्सा लिया था। ऐसा कहा जाता है इस प्रतियोगिता में उनके शानदार खेल को देखते हुए ही उनका चयन अंतरराष्ट्रीय भारतीय हॉकी टीम में किया गया था।

मेजर ध्यान चंद हॉकी के खेल में एक महान खिलाडी के रूप में जाने जाते थे. इनको ”हॉकी विजार्ड” के नाम से भी पहचान मिली हुई थी और यह पहचान उनको एक मैच के कारण मिली

उन्होंने एक मैच के अंतिम 4 मिनट में 3 गोल किए, जिसमें उनकी टीम 2 गोल से हार रही थी, और अपनी टीम को मैच में जीत दिलाई। झेलम में पंजाब इन्फैंट्री टूर्नामेंट का यह फाइनल मैच था। इस मैच के बाद ध्यानचंद को “हॉकी विजार्ड” नाम दिया गया।

ध्यानचंद का अन्तराष्ट्रीय करियर ( Dhyan Chand International Hockey Career )

वर्ष 1926 में मेजर ध्यान चंद को न्यूजीलैंड के दौरे पर जाने वाली भारतीय हॉकी टीम के लिए चुना गया था। दौरे के दौरान, भारतीय टीम ने डैनकेरके में खेले गए एक मैच में 20 गोल किए और उनमें से अकेले ध्यानचंद ने 10 गोल किए थे। 

भारत ने दौरे पर 21 मैच खेले, जिसमें से उसने 18 जीते, 1 हारे और 2 मैच ड्रॉ रहे। टीम ने कुल 192 गोल किए और अकेले ध्यान चंद ने उनमें से 100 से अधिक गोल किए। भारत लौटने के बाद, उन्हें सेना में लांस नायक के पद पर पदोन्नत किया गया। साल 1927 में लंदन फोकस्टोन फेस्टिवल में, उन्होंने इस आयोजन में खेले गए 10 मैचों में भारत के कुल 72 गोलों में से 36 गोल किए।

ध्यानचंद्र
1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम

वह 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम के लिए खेले, और नीदरलैंड के खिलाफ फाइनल मैच में 3 में से 2 गोल किए, भारत को 3-0 की जीत से स्वर्ण पदक दिलाया।

 लॉस एंजिल्स ओलंपिक 1932 में, लाल शाह बुखारी के नेतृत्व में भारतीय टीम ने फिर से स्वर्ण पदक जीता। टूर्नामेंट में, भारतीय हॉकी टीम ने यूएसए हॉकी टीम को 23-1 से हराया, जो वर्ष 2003 में टूटने तक एक विश्व रिकॉर्ड बना रहा। इन 23 गोलों में से 8 अकेले ध्यानचंद ने बनाए। इवेंट में भारत के लिए ध्यानचंद ने 2 मैचों में 12 गोल किए।

ध्यानचंद्र
1932 में बर्लिन ओलम्पिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम

बर्लिन ओलंपिक 1932 में, भारतीय ने टूर्नामेंट में एक भी गोल गंवाए बिना हंगरी को 4-0 से, अमरीका को 7-0 से और जापान को 9 -0 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया था। टीम ने सेमीफाइनल में फ्रांस को 10 गोल से हराया और फाइनल में जर्मनी से मुकाबला करने जा रही थी।

फाइनल मैच में भारतीय टीम इंटरवल तक सिर्फ 1 गोल ही कर सकी। ध्यानचंद ने इंटरवल में अपने जूते उतार दिए और नंगे पांव मैच खेला। भारतीय टीम ने मैच और गोल्ड मेडल 8-1 से जीत लिया।

एडॉल्फ हिटलर, जर्मन तानाशाह, ने माना जाता है कि ध्यानचंद को भारतीय सेना में उनके द्वारा रखे गए पद की तुलना में जर्मन सेना में एक उच्च पद की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने विनम्रता से इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

वह 42 साल की उम्र तक खेलते रहे, और 1948 में खेल से संन्यास ले लिया। मेजर ध्यान चंद ने वर्ष 1935 में एडिलेड में क्रिकेट उस्ताद डॉन ब्रैडमैन से मुलाकात की। उन्हें हॉकी खेलते हुए देखने के बाद, ब्रैडमैन ने कहा की, “उन्होंने रन जैसे गोल किए। ।”

ध्यानचंद के रिकार्ड्स ( Dhyan Chand Records)

• उन्होंने अपने करियर में लगभग 1000 गोल किए हैं, जिनमें से 400 अंतरराष्ट्रीय मैचों में थे।
• उनके नाम 3 ओलंपिक स्वर्ण पदक हैं।

ध्यानचंद्र
बर्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद


• वह 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में 14 गोल के साथ और 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भी गोल करने वाले मुख्य खिलाड़ी थे।
• 1935 के न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के दौरे में, ध्यानचंद ने केवल 43 मैचों में 201 गोल किए, जो एक विश्व रिकॉर्ड है।

ध्यानचंद्र
हॉकी फैन ध्यानचंद के साथ मैच से पहले

ध्यानचंद मृत्यु एवं कारण (Dhyan Chand Death Cause)

हॉकी के जादूगर ध्यान चंद के अंतिम दिन बहुत बढ़िया नहीं रहे थे, क्योंकि उनके पास पैसे की कमी थी और इतने स्वर्ण पैदक दिलाने के बाद भी राष्ट्र द्वारा उनको बुरी तरह से भुला दिया गया था । उनको लीवर का कैंसर हो गया था और उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में एक सामान्य वार्ड में भेजा गया। 3 दिसंबर 1979 को उनका निधन हो गया।

ध्यानचंद अवार्ड्स व अचीवमेंट (Dhyan Chand Award)

  • राष्ट्र के लिए उनकी असाधारण सेवाओं के लिए, भारत सरकार ध्यानचंद के जन्मदिन (29 अगस्त) को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाती है। 
  • भारतीय डाक सेवा ने उनकी स्मृति में एक डाक टिकट जारी किया गया।
  • नई दिल्ली में स्थित एक स्टेडियम जिसे ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम के नाम से भी जाना जाता है । 
  • उन्हें वर्ष 1956 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
ध्यानचंद्र
पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित ध्यानचंद

ध्यानचंद की पसंद और नापसंद

पसंदीदा पेयप्रदार्थ (Favourite Drink)दूध
पसंदीदा खाना (Favourite Food)मटन और मछली की सब्जी
पसंदीदा मिठाई ( Favourite Dessert) देशी घी में बना हुआ हलवा
पसंदीदा काम ( Favourite Work )खाना पकाना, शिकार करना, मछली पकड़ना, फोटोग्राफी करना, क्रिकेट और कैरम खेलना

ध्यानचंद के ओलंपिक पदक(Dhyan Chand Olympic gold madel)

सालप्रतियोगिता का नाम प्रतिद्वंदी टीम का नाम पदक
1928 एम्सटर्डम ओलम्पिक खेलहालैंड स्वर्ण पदक
1932 लॉस एंजिल्स ओलम्पिक खेलअमेरिकास्वर्ण पदक
1936 बर्लिन ओलम्पिक खेलजर्मनस्वर्ण पदक

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ध्यानचंद अवार्ड ( Dhyan Chand Award )

भारत सरकार ने ध्यानचंद के बेहतरीन हॉकी खेल से प्रभावित होकर उनको भारत के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया कुछ समय पहले उनको भारत रत्न से भी सम्मानित करने की भी बात कही जा रही थी।

मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवार्ड (Major Dhyan Chand Khel Ratna Award)

कुछ समय पहले ही भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र सिंह मोदी जी ने भारत का सबसे उच्च खेल पुरस्कार ,राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर  ‘मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवार्ड’ कर दिया गया है।

ध्यानचंद्र
मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवार्ड

प्रधानमंत्री ने इस बात की घोषणा साल 2021 में चल रहे ”टोक्यो ओलम्पिक 2020”के दौरान की उन्होंने कहा की मेजर ध्यानचंद भारत के लिए हॉकी के सबसे अहम् खिलाडी थे जिन्होंने भारत का नाम विदेशो में ऊंचा किया था।

शुक्रवार 06 अगस्त 2021 को ,भारत की महिला हॉकी टीम की खिलाड़ियों के ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ कांस्य पदक मैच में दिल जीतने के कुछ समय बाद, पीएम मोदी ने ट्वीट किया:

“मुझे भारत भर के नागरिकों से मेजर ध्यानचंद के नाम पर खेल रत्न पुरस्कार का नाम देने के लिए कई अनुरोध मिल रहे हैं। मैं धन्यवाद देता हूं उनके विचारों के लिए।

“उनकी भावना का सम्मान करते हुए, खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जाएगा!”

राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर ”मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवार्ड” रखने के लिए भारत के लोगो द्वारा प्रधानमंत्री जी से अनुरोध किया गया था।

FAQ

ध्यानचंद की मौत कैसे हुयी थी ?

ध्यानचंद को लीवर का कैंसर हो गया था जिसकी वजह से उनकी मौत हुई थी

ध्यानचंद की मौत कब हुई थी ?

ध्यानचंद की मौत 3 दिसम्बर 1979 को हुई थी

ध्यानचंद की जाति क्या है ?

ध्यानचंद जाति राजपूत है

ध्यानचंद का जन्म कब हुआ था ?

ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को हुआ था

ध्यानचंद के जन्म दिवस को किस रूप में मनाया जाता है ?

राष्ट्रीय खेल दिवस

ध्यानचंद पुरस्कार राशि कितनी होती है ?

10 लाख रुपए

ध्यानचंद स्टेडियम कहां है ?

ध्यानचंद स्टेडियम दिल्ली में स्थित है

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अंतिम कुछ शब्द –

दोस्तों मै आशा करता हूँ आपको ”मेजर ध्यानचंद का जीवन परिचय,पुरस्कार 2021। Dhyan chand Hockey Player Biography in Hindi” वाला Blog पसंद आया होगा अगर आपको मेरा ये Blog पसंद आया हो तो अपने दोस्तों और अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर करे लोगो को भी इसकी जानकारी दे

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