नौजवान भारत सभा
भगत सिंह द्वारा स्थापित भारत का पहला व्यापक क्रांतिकारी जन-आंदोलन — 1926 से 1931
नौजवान भारत सभा (Naujawan Bharat Sabha) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक क्रांतिकारी युवा संगठन था जिसकी स्थापना 1926 में लाहौर, पंजाब में भगत सिंह, भगवती चरण वोहरा, सुखदेव थापर और अन्य युवा क्रांतिकारियों ने की थी। इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं को ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध क्रांतिकारी राजनीतिक चेतना से जोड़ना, सांप्रदायिक एकता बनाए रखना और समाजवादी-गणतंत्रवादी विचारधारा का प्रचार करना था। यह संगठन HSRA (हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन) की सार्वजनिक शाखा के रूप में कार्य करता था।
- स्थापना: 1926, लाहौर — भगत सिंह, भगवती चरण वोहरा, सुखदेव एवं साथियों द्वारा।
- उद्देश्य: युवाओं में क्रांतिकारी चेतना, सांप्रदायिक एकता, समाजवाद और ब्रिटिश-विरोध का प्रसार।
- विचारधारा: क्रांतिकारी राष्ट्रवाद, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, वैज्ञानिक सोच, साम्राज्यवाद-विरोध।
- HSRA से संबंध: नौजवान भारत सभा HSRA की खुली जन-शाखा थी — जन-समर्थन जुटाने का माध्यम।
- प्रमुख सदस्य: भगत सिंह, सुखदेव, भगवती चरण वोहरा, यशपाल, शिव वर्मा, बटुकेश्वर दत्त, जयदेव कपूर, दुर्गा देवी वोहरा।
- ऐतिहासिक महत्व: भारत में पहली बार युवाओं को संगठित क्रांतिकारी राजनीति से जोड़ने का प्रयास; धर्मनिरपेक्ष-समाजवादी विचारधारा का प्रचार।
नौजवान भारत सभा क्या थी?
नौजवान भारत सभा 1926 में लाहौर में स्थापित एक क्रांतिकारी युवा संगठन था। इसकी स्थापना भगत सिंह और उनके साथियों ने की। यह संगठन HSRA की सार्वजनिक शाखा के रूप में कार्य करता था और भारतीय युवाओं को समाजवादी-गणतंत्रवादी विचारधारा से जोड़ने का प्रयास करता था।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में नौजवान भारत सभा एक अद्वितीय स्थान रखती है। यह केवल एक क्रांतिकारी संगठन नहीं था — यह भारतीय युवाओं की वह प्रयोगशाला थी जहाँ भगत सिंह और उनके साथियों ने समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और वैज्ञानिक सोच को क्रांतिकारी राष्ट्रवाद के साथ जोड़कर एक नई राजनीतिक दिशा निर्धारित की।[1]
1920 के दशक का भारत गहरे राजनीतिक संक्रमण के दौर में था। गाँधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन 1922 में अचानक वापस ले लिया गया था। इस निर्णय से देश के लाखों युवाओं में निराशा और क्रोध था। वे एक नई दिशा खोज रहे थे — एक ऐसी राजनीतिक शक्ति जो भारत की स्वतंत्रता के लिए अधिक ठोस और सक्रिय रास्ता अपनाए।
इसी ऐतिहासिक मोड़ पर भगत सिंह और उनके साथियों ने नौजवान भारत सभा की स्थापना की। यह संगठन एक तरफ युवाओं को खुले मंच पर राजनीतिक शिक्षा देता था और दूसरी तरफ HSRA की भूमिगत क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए जन-आधार तैयार करता था।
| पूरा नाम | नौजवान भारत सभा (Naujawan Bharat Sabha) |
| स्थापना वर्ष | 1926 |
| स्थापना स्थान | लाहौर, पंजाब (अब पाकिस्तान) |
| प्रमुख संस्थापक | भगत सिंह, भगवती चरण वोहरा, सुखदेव थापर |
| संगठन प्रकार | क्रांतिकारी युवा संगठन (सार्वजनिक शाखा) |
| विचारधारा | क्रांतिकारी राष्ट्रवाद, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, साम्राज्यवाद-विरोध |
| प्रमुख उद्देश्य | युवा-जागरण, राजनीतिक शिक्षा, सांप्रदायिक एकता, ब्रिटिश-विरोध |
| संबंधित संगठन | HSRA, HRA, ग़दर पार्टी |
| सक्रियता काल | लगभग 1926–1931 |
| ऐतिहासिक महत्व | पहला संगठित क्रांतिकारी युवा आंदोलन; धर्मनिरपेक्ष-समाजवादी विचारधारा का प्रचार |
| विरासत | भारतीय वामपंथी युवा राजनीति की नींव; भगत सिंह के विचारों का प्रचार माध्यम |
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
नौजवान भारत सभा को समझने के लिए 1919 से 1926 के बीच की राजनीतिक घटनाओं को समझना आवश्यक है। यह वह काल था जब भारतीय राजनीति में गहरी उथल-पुथल चल रही थी।[1]
प्रथम विश्वयुद्ध का प्रभाव (1914–1918)
प्रथम विश्वयुद्ध में भारतीयों ने ब्रिटिश सेना में लाखों की संख्या में सेवा की। युद्ध समाप्त होने के बाद भारतीयों को स्वशासन की उम्मीद थी। परंतु ब्रिटिश सरकार ने इसके बदले 1919 का रौलट एक्ट थोप दिया — जो बिना मुकदमे के गिरफ्तारी की अनुमति देता था।
जलियाँवाला बाग हत्याकांड (1919)
13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में जनरल डायर के आदेश पर निहत्थी भीड़ पर गोलियाँ चलाई गईं। सैकड़ों निर्दोष मारे गए। इस नरसंहार ने पूरे भारत में ब्रिटिश शासन के प्रति नफरत की लहर पैदा कर दी। युवा भगत सिंह तब महज 11-12 वर्ष के थे और इस घटना ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी।[2]
असहयोग आंदोलन और उसकी वापसी (1920–1922)
महात्मा गाँधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन ने लाखों भारतीयों को एक मंच पर ला दिया। परंतु फरवरी 1922 में चौरी चौरा की घटना के बाद गाँधी ने अचानक आंदोलन वापस ले लिया। इस निर्णय से देशभर के क्रांतिकारी युवाओं में गहरा असंतोष पैदा हुआ। भगत सिंह जैसे युवाओं को लगा कि अहिंसक उपायों से स्वतंत्रता नहीं मिलेगी।
HRA का गठन और काकोरी कांड (1924–1925)
1924 में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) का गठन हुआ। 1925 में काकोरी कांड हुआ जिसमें राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ जैसे क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सरकार के खजाने को लूटने का प्रयास किया। इस घटना के बाद ब्रिटिश सरकार ने क्रांतिकारियों पर भयंकर दमन किया। राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ, रोशन सिंह और राजेंद्र लाहिड़ी को फाँसी दी गई।
काकोरी कांड के बाद HRA कमजोर पड़ गया। इसी संदर्भ में भगत सिंह और उनके साथियों ने एक नए संगठन की जरूरत महसूस की — एक ऐसा संगठन जो युवाओं को खुले मंच पर राजनीतिक शिक्षा दे और जन-आधार तैयार करे। यहीं से नौजवान भारत सभा का विचार जन्मा।
1926 के आसपास पंजाब में सांप्रदायिक हिंसा भी बढ़ रही थी। लाला लाजपत राय जैसे नेता हिंदू-मुस्लिम एकता की बात करते थे। भगत सिंह चाहते थे कि क्रांतिकारी आंदोलन धर्म और जाति से ऊपर उठकर वर्ग-चेतना पर आधारित हो।
भगत सिंह ने नौजवान भारत सभा क्यों बनाई?
भगत सिंह ने नौजवान भारत सभा की स्थापना के पीछे कई गहरे राजनीतिक कारण थे। वे समझ चुके थे कि स्वतंत्रता की लड़ाई केवल बम और बंदूक से नहीं, बल्कि जन-चेतना और व्यापक जन-समर्थन से जीती जाएगी।[3]
भगत सिंह का मानना था कि बम फेंकने से क्रांति नहीं होती — क्रांति के लिए व्यापक जन-जागरण आवश्यक है। नौजवान भारत सभा उनकी इसी सोच की अभिव्यक्ति थी। उन्होंने कहा था: “बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं होती — क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।”
स्थापना एवं संस्थापक
नौजवान भारत सभा की स्थापना 1926 में लाहौर, पंजाब में हुई। इसके प्रमुख संस्थापकों में भगत सिंह, भगवती चरण वोहरा और सुखदेव थापर शामिल थे। यह संगठन भारतीय युवाओं को क्रांतिकारी राजनीति से जोड़ने के उद्देश्य से बनाया गया था।
नौजवान भारत सभा की स्थापना लगभग 1926 में लाहौर में हुई। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार इसके गठन में भगत सिंह, भगवती चरण वोहरा, सुखदेव थापर और अन्य क्रांतिकारी युवाओं की केंद्रीय भूमिका थी।[1]
यह संगठन लाहौर से शुरू होकर धीरे-धीरे पंजाब के अन्य शहरों और उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में फैला। इसकी शाखाएँ अमृतसर, रावलपिंडी, लायलपुर (अब फैसलाबाद) और अन्य नगरों में खुलीं।
कुछ स्रोत नौजवान भारत सभा की स्थापना वर्ष 1926 बताते हैं, जबकि कुछ इसे 1927 का संगठन मानते हैं। अधिकांश इतिहासकार 1926 को स्थापना वर्ष मानते हैं। इस विषय पर National Archives of India के अभिलेखों को प्रामाणिक माना जाता है।
संस्थापकों का परिचय
| संस्थापक सदस्य | भूमिका | विशेष योगदान |
|---|---|---|
| भगत सिंह | प्रमुख प्रेरणा और नेतृत्व | विचारधारा निर्माण, लेखन, राजनीतिक शिक्षा |
| भगवती चरण वोहरा | प्रमुख संगठनकर्ता एवं विचारक | पर्चे, घोषणापत्र और सैद्धांतिक आधार |
| सुखदेव थापर | संगठन विस्तार | सदस्यता अभियान और युवा-जुड़ाव |
| यशपाल | सक्रिय सदस्य एवं लेखक | क्रांतिकारी साहित्य और प्रचार |
| जयदेव कपूर | सक्रिय सदस्य | संगठन कार्य और छात्र-जुड़ाव |
नौजवान भारत सभा के उद्देश्य
| उद्देश्य | विवरण |
|---|---|
| ब्रिटिश साम्राज्यवाद का विरोध | ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करना — न केवल राजनीतिक बल्कि आर्थिक शोषण से भी मुक्ति। |
| युवा-जागरण | भारतीय युवाओं में राजनीतिक चेतना जागृत करना और उन्हें क्रांतिकारी आंदोलन से जोड़ना। |
| सांप्रदायिक एकता | हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सभी धर्मों के युवाओं को एक मंच पर लाना; धार्मिक विभाजन का विरोध। |
| समाजवादी गणराज्य की स्थापना | स्वतंत्रता के बाद ऐसे गणतंत्र की स्थापना जिसमें समानता और सामाजिक न्याय हो। |
| राजनीतिक शिक्षा | युवाओं को समाजवाद, साम्राज्यवाद, वर्ग-संघर्ष और अंतर्राष्ट्रीय क्रांतिकारी आंदोलनों से परिचित कराना। |
| मजदूर-किसान एकजुटता | श्रमिक वर्ग और किसानों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना। |
| वैज्ञानिक सोच का प्रसार | अंधविश्वास और धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध तर्कसंगत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रचार। |
| छात्र-आंदोलन | विद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रों को राजनीतिक रूप से जागरूक करना। |
विचारधारा
नौजवान भारत सभा की विचारधारा उस समय के भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में अत्यंत अनूठी थी। यह संगठन केवल ब्रिटिश-विरोध तक सीमित नहीं था — इसने एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण अपनाया।[3]
| विचारधारा का आयाम | विवरण | प्रमुख प्रभाव |
|---|---|---|
| क्रांतिकारी राष्ट्रवाद | भारत की पूर्ण स्वतंत्रता — सशस्त्र और जन-क्रांति के माध्यम से | ग़दर पार्टी, भारतीय क्रांतिकारी परंपरा |
| समाजवाद | पूँजीवादी शोषण का विरोध; उत्पादन के साधनों पर जन-नियंत्रण | कार्ल मार्क्स, लेनिन, रूसी क्रांति |
| गणतंत्रवाद | राजशाही और साम्राज्यवाद का विरोध; लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना | फ्रांसीसी क्रांति, अमेरिकी स्वतंत्रता |
| धर्मनिरपेक्षता | धर्म को राजनीति से अलग रखना; सांप्रदायिक राजनीति का विरोध | भगत सिंह का तर्कवाद |
| साम्राज्यवाद-विरोध | सभी प्रकार के उपनिवेशवाद का विरोध — भारत में और विश्वभर में | अंतर्राष्ट्रीय वामपंथी आंदोलन |
| वैज्ञानिक सोच | अंधविश्वास और धार्मिक रूढ़िवाद का विरोध; तर्कसंगत दृष्टिकोण | यूरोपीय ज्ञानोदय, मार्क्सवादी भौतिकवाद |
| सामाजिक समता | जाति-भेद, छुआछूत और लैंगिक भेदभाव का विरोध | भगत सिंह के सामाजिक लेख |
नौजवान भारत सभा की विचारधारा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह था कि उसने राष्ट्रवाद को समाजवाद के साथ जोड़ा। भगत सिंह का मानना था कि केवल अंग्रेजों को हटाने से काम नहीं चलेगा — भारतीय पूँजीपतियों और जमींदारों द्वारा होने वाले आर्थिक शोषण से भी मुक्ति जरूरी है।
यह विचारधारा उस समय की कांग्रेस की मुख्यधारा से भिन्न थी। कांग्रेस जहाँ संवैधानिक तरीकों और स्वराज पर जोर देती थी, वहाँ नौजवान भारत सभा क्रांतिकारी परिवर्तन और सामाजिक-आर्थिक न्याय की माँग कर रही थी।
संगठन संरचना
नौजवान भारत सभा एक खुला, सार्वजनिक संगठन था जो HSRA की भूमिगत गतिविधियों के विपरीत अपनी बैठकें और सभाएँ खुलेआम करता था।[4]
सदस्यता
कोई भी भारतीय युवा — हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई — जो ब्रिटिश साम्राज्यवाद का विरोध करता हो और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों में विश्वास रखता हो, इसका सदस्य बन सकता था। सदस्यता शुल्क न्यूनतम रखा गया था ताकि आर्थिक रूप से कमजोर युवा भी जुड़ सकें।
बैठकें और सभाएँ
संगठन नियमित रूप से सार्वजनिक सभाएँ, भाषण और बहसें आयोजित करता था। इन सभाओं में भगत सिंह, भगवती चरण वोहरा और अन्य नेता देश की राजनीतिक स्थिति, साम्राज्यवाद और समाजवाद पर व्याख्यान देते थे।
शाखाएँ
मुख्यालय लाहौर में था। शाखाएँ पंजाब के अन्य शहरों — अमृतसर, रावलपिंडी, लायलपुर, मुल्तान — में खोली गईं। धीरे-धीरे उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों में भी संगठन का विस्तार हुआ।
नौजवान भारत सभा का सार्वजनिक चरित्र जानबूझकर था। जहाँ HSRA की गतिविधियाँ गुप्त रखी जाती थीं, वहाँ नौजवान भारत सभा खुले मंच पर काम करती थी। इससे एक ओर व्यापक जन-समर्थन मिला और दूसरी ओर युवाओं को राजनीतिक शिक्षा का अवसर मिला।
प्रमुख गतिविधियाँ
| गतिविधि | विवरण |
|---|---|
| सार्वजनिक सभाएँ | राजनीतिक मुद्दों पर बड़ी जन-सभाएँ आयोजित करना — समाजवाद, साम्राज्यवाद, सांप्रदायिकता पर चर्चा। |
| पर्चे और घोषणापत्र | क्रांतिकारी विचारों का प्रचार करने वाले पर्चे और लेख लिखना व वितरित करना। |
| छात्र-जुड़ाव | स्कूल और कॉलेज के छात्रों को राजनीतिक रूप से जागरूक करना और संगठन से जोड़ना। |
| मजदूर-आंदोलन | मजदूरों की हड़तालों और आंदोलनों में भाग लेना; उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाना। |
| ब्रिटिश नीतियों का विरोध | साइमन कमीशन, रौलट एक्ट जैसी नीतियों के विरुद्ध प्रदर्शन। |
| राजनीतिक साहित्य | क्रांतिकारी और समाजवादी साहित्य का अनुवाद, प्रकाशन और वितरण। |
| जागरूकता अभियान | सांप्रदायिक सद्भाव, सामाजिक समता और तर्कवाद के लिए जागरूकता अभियान। |
| भर्ती अभियान | HSRA के लिए उपयुक्त युवाओं की पहचान और प्रेरणा। |
1928 में साइमन कमीशन के विरोध में लाहौर में बड़ा प्रदर्शन हुआ। नौजवान भारत सभा इस आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल थी। 30 अक्टूबर 1928 को लाला लाजपत राय के नेतृत्व में एक शांतिपूर्ण जुलूस पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हुए और 17 नवंबर 1928 को उनका निधन हो गया।
लाला लाजपत राय की मृत्यु ने नौजवान भारत सभा और HSRA के सदस्यों को गहरे आघात और क्रोध से भर दिया। इसी का बदला लेने के लिए भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने सांडर्स वध की योजना बनाई।
महत्वपूर्ण सदस्य
| सदस्य | भूमिका | उल्लेखनीय योगदान |
|---|---|---|
| भगत सिंह | प्रमुख प्रेरणा और नेतृत्व | विचारधारा निर्माण; बाद में HSRA का नेतृत्व; असेंबली बम कांड; शहादत 23 मार्च 1931 |
| भगवती चरण वोहरा | विचारक, लेखक, संगठनकर्ता | ‘बम का दर्शन’ पर्चे के लेखक; HSRA के प्रचार विभाग के प्रमुख |
| सुखदेव थापर | संगठन विस्तार, छात्र-जुड़ाव | लाहौर कांस्पिरेसी केस; शहादत 23 मार्च 1931 |
| यशपाल | सक्रिय सदस्य, लेखक | क्रांतिकारी गतिविधियाँ; बाद में प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार |
| शिव वर्मा | सक्रिय सदस्य | HSRA गतिविधियाँ; लाहौर कांस्पिरेसी केस के अभियुक्त |
| बटुकेश्वर दत्त | सक्रिय सदस्य | भगत सिंह के साथ केंद्रीय विधानसभा में बम फेंकना (1929); आजीवन कारावास |
| जयदेव कपूर | सक्रिय सदस्य | संगठन और छात्र-जुड़ाव गतिविधियाँ |
| दुर्गा देवी वोहरा | महिला सदस्य (भगवती चरण वोहरा की पत्नी) | HSRA की गतिविधियों में सक्रिय सहयोग; भगत सिंह को लाहौर से भागने में मदद |
इस सूची में केवल ऐतिहासिक रूप से सत्यापित सदस्यों को शामिल किया गया है। नौजवान भारत सभा के कई सदस्यों के नाम ऐतिहासिक अभिलेखों में अंकित नहीं हैं। कोई भी असत्यापित सदस्यता का दावा इस लेख में नहीं किया गया है।
HRA से संबंध
हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA)की स्थापना 1924 में हुई थी। काकोरी कांड (1925) के बाद ब्रिटिश सरकार के दमन से HRA कमजोर पड़ गई। इसी पृष्ठभूमि में 1926 में नौजवान भारत सभा की स्थापना हुई।[2]
HRA और नौजवान भारत सभा में एक सातत्य था — दोनों ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध सशस्त्र और क्रांतिकारी राजनीति में विश्वास रखते थे। परंतु नौजवान भारत सभा ने एक नया आयाम जोड़ा — व्यापक जन-आधार, खुला मंच और समाजवादी विचारधारा।
1928 में HRA का नाम बदलकर HSRA (हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन) कर दिया गया। ‘सोशलिस्ट’ शब्द का जुड़ना इसी बदलाव को दर्शाता है जो भगत सिंह और उनके साथियों ने HRA की विचारधारा में किया।
HSRA से संबंध — सार्वजनिक और भूमिगत
नौजवान भारत सभा सार्वजनिक शाखा थी जो खुले मंच पर जन-जागरण और राजनीतिक शिक्षा का कार्य करती थी। HSRA भूमिगत क्रांतिकारी संगठन था जो सशस्त्र कार्रवाइयों की योजना बनाता था। दोनों का उद्देश्य एक था — भारत की पूर्ण स्वतंत्रता — परंतु कार्यप्रणाली भिन्न थी।
| पहलू | नौजवान भारत सभा | HSRA |
|---|---|---|
| प्रकृति | सार्वजनिक, खुला संगठन | भूमिगत, गुप्त संगठन |
| कार्यप्रणाली | सभाएँ, भाषण, पर्चे, जन-जागरण | सशस्त्र कार्रवाई, बम विस्फोट, हत्याएँ |
| सदस्यता | खुली — कोई भी युवा जुड़ सकता था | गुप्त — सोच-समझकर चुने गए सदस्य |
| उद्देश्य | जन-समर्थन, राजनीतिक चेतना, भर्ती | ब्रिटिश सत्ता को सीधी चुनौती |
| विचारधारा | समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, जन-जागरण | क्रांतिकारी गणतंत्रवाद, समाजवाद |
| ब्रिटिश निगरानी | खुले में — आसानी से निगरानी | गुप्त — सरकार की नजर से छिपकर |
| परस्पर संबंध | HSRA के लिए जन-आधार और भर्ती माध्यम | नौजवान भारत सभा के नेतृत्व के साथ ओवरलैप |
दोनों संगठनों के बीच नेतृत्व का ओवरलैप था — कई नेता दोनों में सक्रिय थे। यह एक जानबूझकर की गई रणनीति थी: नौजवान भारत सभा सार्वजनिक मंच प्रदान करती थी और HSRA भूमिगत कार्रवाई करता था। यह दो-स्तरीय रणनीति अन्य देशों के क्रांतिकारी आंदोलनों से प्रेरित थी।
ग़दर आंदोलन से संबंध
ग़दर पार्टी की स्थापना 1913 में अमेरिका में प्रवासी भारतीयों — विशेषकर पंजाबी सिखों — ने की थी। इसका उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराना था। ग़दर पार्टी के नेताओं में सोहन सिंह भकना, लाला हरदयाल, करतार सिंह सराभा और बाद में बाबा गुरदित सिंह प्रमुख थे।[3]
ग़दर पार्टी का प्रभाव पंजाब में गहरा था। भगत सिंह पंजाब के थे और ग़दर आंदोलन की शहादत परंपरा — विशेषकर करतार सिंह सराभा की शहादत — से वे गहरे प्रभावित थे। कहा जाता है कि भगत सिंह करतार सिंह सराभा की तस्वीर हमेशा अपने साथ रखते थे।
ग़दर पार्टी और नौजवान भारत सभा में कई वैचारिक समानताएँ थीं — दोनों ने सांप्रदायिकता का विरोध किया, दोनों ने हिंदू-मुस्लिम-सिख एकता पर बल दिया, और दोनों ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद से पूर्ण स्वतंत्रता की माँग की।
हालाँकि दोनों संगठन अलग-अलग थे और उनके बीच कोई औपचारिक संबंध नहीं था, परंतु वैचारिक प्रभाव स्पष्ट था।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से संबंध
नौजवान भारत सभा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच संबंध जटिल और बहुआयामी था। दोनों का अंतिम लक्ष्य भारत की स्वतंत्रता था, परंतु रास्ते और विचारधारा में गहरे अंतर थे।
| पहलू | नौजवान भारत सभा | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस |
|---|---|---|
| लक्ष्य | पूर्ण स्वतंत्रता (सशस्त्र क्रांति) | स्वराज (संवैधानिक तरीके; 1929 से पूर्ण स्वतंत्रता) |
| विचारधारा | समाजवाद, क्रांतिकारी राष्ट्रवाद | गाँधीवाद, उदार राष्ट्रवाद |
| तरीका | क्रांतिकारी, सशस्त्र प्रतिरोध | अहिंसा, असहयोग, सत्याग्रह |
| वर्ग-आधार | मजदूर, युवा, छात्र | व्यापक — सभी वर्ग |
| सांप्रदायिकता पर | कट्टर धर्मनिरपेक्ष विरोध | भिन्न नेताओं की भिन्न राय |
भगत सिंह ने कांग्रेस की आलोचना की, विशेषकर गाँधी के असहयोग आंदोलन को अचानक वापस लेने के निर्णय की। परंतु उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रवादी आंदोलन के साथ सहयोग भी किया जब जरूरी था — जैसे साइमन कमीशन विरोध में।
ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया
ब्रिटिश सरकार शुरुआत से ही नौजवान भारत सभा की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखती थी। CID (Criminal Investigation Department) के गुप्तचर इसकी सभाओं में उपस्थित रहते और रिपोर्ट तैयार करते।[4]
| ब्रिटिश कार्रवाई | विवरण |
|---|---|
| निगरानी | CID एजेंटों द्वारा सभाओं, बैठकों और सदस्यों की निरंतर निगरानी। |
| खुफिया रिपोर्ट | पंजाब और केंद्रीय सरकार को नियमित रिपोर्ट — सदस्यों के नाम, गतिविधियाँ और विचारधारा। |
| गिरफ्तारियाँ | सांडर्स वध (1928) और असेंबली बम कांड (1929) के बाद भगत सिंह और अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी। |
| लाहौर कांस्पिरेसी केस | 1929 में मुकदमा — भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फाँसी की सजा। |
| संगठन पर रोक | भगत सिंह की शहादत और प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद संगठन व्यावहारिक रूप से समाप्त हो गया। |
जुड़ी प्रमुख घटनाएँ
| घटना | तिथि | नौजवान भारत सभा से संबंध |
|---|---|---|
| साइमन कमीशन विरोध | 1928 | संगठन ने विरोध प्रदर्शन में सक्रिय भाग लिया; लाला लाजपत राय की मृत्यु ने संगठन को गहरा आघात पहुँचाया। |
| सांडर्स वध | 17 दिसंबर 1928 | भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए ब्रिटिश पुलिस अधिकारी सांडर्स को मारा। |
| असेंबली बम कांड | 8 अप्रैल 1929 | भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका — ‘बहरों को सुनाने’ के लिए। |
| लाहौर कांस्पिरेसी केस | 1929–1931 | भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु पर मुकदमा — 23 मार्च 1931 को तीनों को फाँसी। |
| जेल भूख हड़ताल | 1929 | भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारियों की जेल में 63 दिनों की भूख हड़ताल — राजनीतिक कैदियों के अधिकारों के लिए। |
ऐतिहासिक महत्व
नौजवान भारत सभा का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण स्थान है।[5]
इतिहासकार बिपिन चंद्र के अनुसार नौजवान भारत सभा भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन को केवल व्यक्तिगत वीरता के स्तर से उठाकर एक संगठित, वैचारिक आंदोलन के स्तर पर ले जाने का प्रयास था। इसने पहली बार क्रांतिकारी राष्ट्रवाद को समाजवादी आर्थिक दर्शन के साथ जोड़ा।
यह संगठन अल्पकालिक था — केवल कुछ वर्षों तक सक्रिय रहा। परंतु इसने जो वैचारिक और संगठनात्मक बीज बोए, उनका प्रभाव भारतीय वामपंथी राजनीति पर दशकों तक रहा।
विरासत
नौजवान भारत सभा — कालक्रम
नौजवान भारत सभा से जुड़े 15 रोचक तथ्य
मिथक बनाम सच्चाई
| प्रचलित मिथक | ऐतिहासिक तथ्य |
|---|---|
| नौजवान भारत सभा और HSRA एक ही संगठन थे। | दोनों अलग-अलग संगठन थे — नौजवान भारत सभा सार्वजनिक शाखा थी, HSRA भूमिगत। हालाँकि नेतृत्व में ओवरलैप था। |
| नौजवान भारत सभा केवल भगत सिंह का संगठन था। | इसकी स्थापना में भगवती चरण वोहरा, सुखदेव और अन्य साथियों की भी केंद्रीय भूमिका थी। |
| यह संगठन केवल सशस्त्र हिंसा में विश्वास रखता था। | नौजवान भारत सभा मुख्यतः जन-जागरण, राजनीतिक शिक्षा और सार्वजनिक प्रचार का कार्य करता था। हिंसक कार्यवाहियाँ HSRA के दायरे में थीं। |
| संगठन केवल हिंदू युवाओं के लिए था। | यह एक धर्मनिरपेक्ष संगठन था जो हिंदू, मुस्लिम, सिख सभी युवाओं को एक मंच पर लाना चाहता था। |
| नौजवान भारत सभा 1947 तक सक्रिय रही। | 1931 में भगत सिंह की शहादत के बाद यह संगठन व्यावहारिक रूप से समाप्त हो गया। |
| यह संगठन कांग्रेस के विरुद्ध था। | नौजवान भारत सभा कांग्रेस की विचारधारा और तरीकों से असहमत था, परंतु साझा लक्ष्यों के लिए सहयोग भी करता था। |
सामान्य प्रश्न एवं उत्तर (FAQ)
निष्कर्ष
1926 में लाहौर में स्थापित नौजवान भारत सभा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वह प्रयोगशाला थी जहाँ भगत सिंह और उनके साथियों ने समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और क्रांतिकारी राष्ट्रवाद का अनूठा संगम किया। यह संगठन अल्पकालिक था, परंतु इसके वैचारिक बीज भारतीय प्रगतिशील आंदोलन में आज भी जीवित हैं।
भगत सिंह की शहादत ने इसे समाप्त किया — परंतु उनके विचार, उनकी सोच और उनका सपना नौजवान भारत सभा की विरासत के रूप में आज भी हर उस भारतीय को प्रेरित करते हैं जो सामाजिक न्याय, समता और वैज्ञानिक सोच में विश्वास रखता है।
- National Archives of India — Naujawan Bharat Sabha and HSRA Records (1926–1931)
- Chandra, Bipan. India’s Struggle for Independence 1857–1947. Penguin Books India, 1989.
- Nair, Neeti. Changing Homelands: Hindu Politics and the Partition of India. Cambridge: Harvard University Press, 2011.
- Punjab Government Archives — CID Reports on Naujawan Bharat Sabha (1927–1931)
- NCERT — Modern Indian History, Class XII Textbook.
- Encyclopaedia Britannica: Bhagat Singh
- Verma, Shiv. Reminiscences of a Revolutionary. Delhi: National Book Trust, 1988.
- Yashpal. Singhavalokan (Hindi autobiography). Allahabad: Viplav Karyalaya.
यह लेख उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों, सरकारी दस्तावेज़ों, समकालीन स्रोतों तथा प्रतिष्ठित इतिहासकारों के शोध कार्यों के आधार पर तैयार किया गया है। जहाँ किसी ऐतिहासिक घटना, उद्धरण या विवरण के संबंध में विभिन्न स्रोतों में मतभेद पाया जाता है, वहाँ प्रमुख ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर संतुलित एवं तथ्याधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है।
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अंतिम अपडेट: जून 2026 | स्रोत सत्यापन के बाद प्रकाशित | सरकारी एवं सार्वजनिक स्रोतों से जानकारी सत्यापित


