अज़हर इक़बाल Inshorts के सह-संस्थापक, उद्यमी और Shark Tank India के जज हैं। यहां जानिए अज़हर इक़बाल कौन हैं, उन्होंने कौन-सी शिक्षा प्राप्त की है, Inshorts की शुरुआत कैसे की, उनकी कुल संपत्ति कितनी है, वे किस लिए प्रसिद्ध हैं और Shark Tank India तक उनका सफर कैसा रहा। यदि आप “अज़हर इक़बाल विकिपीडिया” या “Azhar Iqubal Biography in Hindi” खोज रहे हैं, तो यहां उनके जीवन परिचय से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी मिलेगी।
अज़हर इक़बाल
अज़हर इक़बाल एक भारतीय उद्यमी हैं, जिनका जन्म किशनगंज, बिहार में हुआ[1]। वे IIT दिल्ली में इंटीग्रेटेड M.Tech (गणित व कंप्यूटिंग) की पढ़ाई कर रहे थे, पर 2012 में पढ़ाई बीच में छोड़कर उद्यमिता की राह चुनी[2]। 2013 में सहपाठियों दीपित पुरकायस्थ व अनुनय पांडे के साथ मिलकर उन्होंने “News in Shorts” नाम से एक फेसबुक पेज शुरू किया, जो आगे चलकर Inshorts — भारत के सबसे लोकप्रिय 60-शब्द न्यूज़ ऐप — में बदल गया। वे Shark Tank India के जज भी रहे हैं और अप्रैल 2024 से Inshorts के चेयरमैन हैं[3]। जनवरी 2025 में उन्होंने एक नई AI कंपनी Fenado AI शुरू की[4]।
एक फेसबुक पेज से शुरू हुई वह यात्रा, जो Inshorts तक पहुँची
बिहार के एक छोटे शहर किशनगंज से निकलकर देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान — IIT दिल्ली — तक पहुँचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। अज़हर इक़बाल ने यह कर दिखाया। लेकिन उनकी कहानी यहीं नहीं रुकती।
कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने एक जोखिम भरा फ़ैसला लिया — इंटीग्रेटेड M.Tech की डिग्री अधूरी छोड़कर, अपने दो सहपाठियों के साथ एक साधारण फेसबुक पेज शुरू करना, जो लोगों को सिर्फ़ 60 शब्दों में खबरें पढ़ाता था। यही आइडिया आगे चलकर Inshorts बना — भारत के सबसे पहचाने जाने वाले न्यूज़ ऐप्स में से एक।
IIT दिल्ली में एडमिशन (2009) → 2012 में पढ़ाई बीच में छोड़ी → 2013 में दोस्तों के साथ “News in Shorts” फेसबुक पेज शुरू किया → उसी साल मोबाइल ऐप लॉन्च → 2015 में ब्रांड का नाम बदलकर Inshorts रखा → 2019 में Public App लॉन्च → 2021 तक कंपनी की वैल्यूएशन करीब $550 मिलियन तक पहुँची → अक्टूबर 2023 में Shark Tank India के जज बने → अप्रैल 2024 में 11 साल CEO रहने के बाद चेयरमैन की भूमिका में गए → जनवरी 2025 में नई AI कंपनी Fenado AI शुरू की।
| पूरा नाम | अज़हर इक़बाल |
| जन्म | किशनगंज, बिहार, भारत (सटीक तिथि पर स्रोतों में मतभेद — नीचे देखें) |
| पेशा | उद्यमी, एंजेल इन्वेस्टर, टीवी पर्सनैलिटी |
| परिवार | बिहार का एक मुस्लिम परिवार; माता-पिता व भाई-बहनों के नाम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं |
| स्कूली शिक्षा | किशनगंज, बिहार में (स्कूल का नाम व्यापक रूप से सत्यापित नहीं) |
| उच्च शिक्षा | IIT दिल्ली — इंटीग्रेटेड M.Tech, गणित एवं कंप्यूटिंग (2009–2012, अधूरी) |
| कंपनी | Inshorts (कानूनी नाम: Inshorts India Advertising and Services Pvt Ltd) |
| सह-संस्थापक (Inshorts) | दीपित पुरकायस्थ, अनुनय अरुणव पांडे |
| पद (Inshorts) | सह-संस्थापक व पूर्व CEO (11 वर्ष) — अब चेयरमैन (अप्रैल 2024 से) |
| मुख्यालय | नोएडा, उत्तर प्रदेश |
| नया वेंचर | Fenado AI — सह-संस्थापक व CEO (जनवरी 2025 से) |
| Shark Tank India | जज — सीज़न 3 (2024) व सीज़न 4 (2025) |
| वैवाहिक स्थिति | अविवाहित (सार्वजनिक रिपोर्ट्स के अनुसार) |
| नेट वर्थ | कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं; मीडिया अनुमान ~₹500 करोड़ |
एक नज़र में पूरी प्रोफाइल
करियर — IIT दिल्ली (अधूरी) → News in Shorts (2013) → Inshorts CEO (2013–2024) → Inshorts चेयरमैन → Shark Tank India जज → Fenado AI के सह-संस्थापक व CEO।
नेट वर्थ — कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है; अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स ₹500 करोड़ के आसपास अनुमान देती हैं, पर इन्हें पुष्ट तथ्य नहीं माना जा सकता।
वे 13 साल, जिन्होंने एक IIT ड्रॉपआउट को भारत के जाने-पहचाने उद्यमी में बदल दिया
किशनगंज का वह छात्र जो IIT दिल्ली तक पहुँचा
अज़हर इक़बाल का जन्म बिहार के किशनगंज ज़िले में हुआ, एक ऐसे परिवार में जिसे कई रिपोर्ट्स “निम्न-मध्यम वर्गीय” बताती हैं। उनके माता-पिता और भाई-बहनों के नाम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं — कई इंटरव्यूज़ में भी उन्होंने अपने परिवार के बारे में विस्तार से बात नहीं की है।[5]
अज़हर इक़बाल की जन्मतिथि को लेकर सार्वजनिक स्रोतों में स्पष्ट सहमति नहीं है। कुछ रिपोर्ट्स 7 अक्टूबर 1992 बताती हैं, तो कुछ अन्य 18 जनवरी 1992 या 1993। जन्म स्थान — किशनगंज, बिहार — को लेकर लगभग सभी स्रोत सहमत हैं। चूँकि कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इस लेख में जन्मतिथि को निश्चित तथ्य के बजाय एक अनुमानित सीमा की तरह दर्शाया गया है।
उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई किशनगंज में ही पूरी की। पढ़ाई में शुरू से अच्छे रहे अज़हर ने IIT-JEE की तैयारी की और 2009 में IIT दिल्ली में दाखिला पाया — इंटीग्रेटेड M.Tech प्रोग्राम में, गणित एवं कंप्यूटिंग (Mathematics and Computing) विषय के साथ।
अज़हर इक़बाल IIT-JEE में लगभग 600वीं ऑल-इंडिया रैंक के साथ पास हुए थे — यह आंकड़ा मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, किसी आधिकारिक स्रोत से पुष्ट नहीं।
IIT दिल्ली के कैंपस में बिताया समय उनके लिए सिर्फ़ पढ़ाई का दौर नहीं था — यहीं उन्हें स्टार्टअप कल्चर, तकनीक और नए विचारों से परिचय मिला। यहीं उनकी मुलाकात दीपित पुरकायस्थ (IIT खड़गपुर के छात्र) और अनुनय अरुणव पांडे (उनके IIT दिल्ली सहपाठी) से हुई — वही दो लोग, जो आगे चलकर उनके सह-संस्थापक बने।
IIT छोड़ने का फैसला: सबसे मुश्किल पर सबसे अहम मोड़
भारत में IIT की सीट पाना ही एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। ज़्यादातर छात्रों और उनके परिवारों के लिए डिग्री बीच में छोड़ना लगभग असोचनीय होता है। अज़हर इक़बाल ने ठीक यही किया — 2012 में उन्होंने IIT दिल्ली की पढ़ाई छोड़ दी।[2]
रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके परिवार को इस फ़ैसले से गहरा झटका लगा था। घर में इस फ़ैसले का समर्थन नहीं मिला, और आसपास के लोगों ने भी उन्हें हतोत्साहित किया। लेकिन अज़हर का मानना था कि जिस आइडिया पर वे काम कर रहे थे — छोटी, आसान भाषा में खबरें देना — उसमें असली संभावना है।
2009 के आसपास भारत में Flipkart और Snapdeal जैसी कंपनियों का उभार शुरू हो चुका था। कई इंटरव्यूज़ में अज़हर ने बताया है कि उसी दौर की स्टार्टअप लहर और सरकार की उस समय की आर्थिक नीतियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि भारत में नए विचारों के लिए जगह बन रही है।
“मैं गांव में पैदा हुआ, जहां लोगों ने मुझे IIT पहुंचने पर भी नहीं लिया गंभीरता से। बाद में जब मैंने IIT छोड़ने का फैसला किया, तो वही लोग फिर सतर्क करने लगे। उनकी बात न सुनना ही मुझे एक कंपनी तक ले गया।”
अज़हर इक़बाल, सार्वजनिक इंटरव्यू मेंInshorts की शुरुआत ऐप से नहीं, एक साधारण फेसबुक पेज से हुई थी
IIT दिल्ली में पढ़ते हुए अज़हर इक़बाल ने एक बात नोटिस की — उनके आसपास के ज़्यादातर छात्र खबरें पढ़ना चाहते थे, पर लंबे और उबाऊ न्यूज़ आर्टिकल्स के लिए उनके पास समय नहीं था। इसी अवलोकन से एक आइडिया निकला: क्या हो अगर खबरों को सिर्फ़ 60 शब्दों में समेट दिया जाए?
2013 में, अज़हर इक़बाल ने अपने IIT दिल्ली सहपाठी अनुनय अरुणव पांडे और IIT खड़गपुर के दीपित पुरकायस्थ के साथ मिलकर “News in Shorts” नाम से एक फेसबुक पेज शुरू किया, जिसमें ट्रेंडिंग खबरों का संक्षिप्त सार दिया जाता था। कुछ ही महीनों में इस पेज को Times Internet के TLabs स्टार्टअप एक्सेलरेटर में जगह मिली, जहां उन्हें करीब ₹10 लाख की शुरुआती फंडिंग 10% इक्विटी के बदले मिली।[6]
News in Shorts का मोबाइल ऐप एंड्रॉइड यूज़र्स के लिए लॉन्च हुआ, जिसमें रोज़ाना ट्रेंडिंग टॉपिक्स की खबरें सिर्फ़ 60 शब्दों में दी जाती थीं — जिन्हें पढ़ने में 30 सेकंड से भी कम समय लगता था।
2015 में कंपनी ने अपने ब्रांड का नाम बदलकर “Inshorts” रख दिया। शुरुआती सालों में टीम ने पेशेवर राइटर्स की एक टीम बनाई, कंटेंट क्वालिटी पर काम किया और विज्ञापन के ज़रिए कमाई शुरू की। अप्रैल 2016 में तियर-2 और तियर-3 शहरों तक पहुँच बढ़ाने के लिए Inshorts का हिंदी वर्ज़न भी लॉन्च किया गया।
तीन सह-संस्थापक, एक साझा विज़न
| व्यक्ति | शिक्षा पृष्ठभूमि | वर्तमान भूमिका |
|---|---|---|
| अज़हर इक़बाल | IIT दिल्ली (अधूरी) | सह-संस्थापक व चेयरमैन (Inshorts); CEO, Fenado AI |
| दीपित पुरकायस्थ | IIT खड़गपुर | सह-संस्थापक व CEO (Inshorts, अप्रैल 2024 से) |
| अनुनय अरुणव पांडे | IIT दिल्ली | सह-संस्थापक |
2013 के आसपास भारत में स्मार्टफोन तेज़ी से सस्ते हो रहे थे, पर मोबाइल डेटा अब भी महंगा और धीमा था। एक ऐसे समय में जब लंबा कंटेंट लोड होने में वक्त लेता था, “60 शब्दों में खबर” वाला आइडिया न सिर्फ़ पढ़ने में आसान था बल्कि डेटा और समय, दोनों बचाता था — यही वजह रही कि यह आइडिया इतनी तेज़ी से लोकप्रिय हुआ।
- Inshorts की शुरुआत ऐप से नहीं, एक फेसबुक पेज से हुई।
- 2013 में लॉन्च हुआ ब्रांड 2015 में “Inshorts” नाम से पुनःब्रांडेड हुआ।
- 60-शब्दों का फॉर्मेट सबसे बड़ी पहचान और सबसे बड़ी ताकत, दोनों बना।
- तीन सह-संस्थापकों में साफ़ भूमिका-विभाजन रहा — नेतृत्व, टेक और ऑपरेशन्स।
Inshorts असल में कमाता कैसे है?
Inshorts का मूल बिज़नेस मॉडल विज्ञापन-आधारित है — यानी कंपनी अपने ऐप पर ब्रांड्स के विज्ञापन दिखाकर कमाई करती है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी 1,500 से ज़्यादा ब्रांड्स के साथ मार्केटिंग कैंपेन कर चुकी है।
| परत | क्या होता है | क्यों ज़रूरी |
|---|---|---|
| कंटेंट क्यूरेशन | अलग-अलग स्रोतों से खबरें जुटाना, 60 शब्दों में सारांश बनाना | प्रोडक्ट की मूल पहचान यहीं टिकी है |
| विज्ञापन/ब्रांड कैंपेन | ऐप के भीतर नेटिव विज्ञापन और ब्रांडेड कंटेंट | कंपनी की कमाई का मुख्य स्रोत |
| मल्टी-प्रोडक्ट रणनीति | Inshorts (न्यूज़) + Public (हाइपरलोकल सोशल नेटवर्क) | यूज़र बेस और रेवेन्यू सोर्स, दोनों में विविधता |
Public App: सिर्फ़ न्यूज़ नहीं, हर शहर की अपनी आवाज़
Inshorts की सफलता के बाद अज़हर इक़बाल और उनकी टीम ने एक नया सवाल पूछा — क्या हो अगर लोगों को अपने ही शहर, मोहल्ले या इलाके से जुड़ी खबरें और जानकारी भी उतनी ही आसानी से मिले?
इसी सोच से जन्मा Public App — एक हाइपरलोकल सोशल नेटवर्क, जहां यूज़र्स अपने आसपास के इवेंट्स, बिज़नेस, नौकरी के मौकों और क्लासिफाइड जैसी जानकारी शेयर कर सकते हैं। लॉन्च के कुछ ही सालों में यह ऐप 100 मिलियन से ज़्यादा डाउनलोड तक पहुँच गया और भारत के सबसे बड़े लोकेशन-आधारित सोशल नेटवर्क्स में गिना जाने लगा।
ज़्यादातर स्रोत Public App के लॉन्च का साल 2019 बताते हैं, जबकि एक रिपोर्ट में यह 2020 दर्ज है। सटीक तारीख को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई एकल, आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
Inshorts की फंडिंग जर्नी: ₹10 लाख से लेकर सैकड़ों करोड़ तक
Inshorts का सफर एक छोटी सी सीड फंडिंग से शुरू हुआ, पर सालों में इसमें कई बड़े वैश्विक निवेशक जुड़ते गए।
| दौर | प्रमुख निवेशक / आंकड़े |
|---|---|
| शुरुआती (2013–14) | Times Internet TLabs — करीब ₹10 लाख, 10% इक्विटी के बदले |
| शुरुआती वृद्धि दौर | Tiger Global, Times Internet, Steadview Capital |
| 2020 | करीब $35 मिलियन — Addition, SIG Global, Tanglin Venture Partners |
| 2021 | करीब $60 मिलियन — वैल्यूएशन करीब $550 मिलियन तक पहुँची |
| कुल फंडिंग (अलग-अलग समय पर रिपोर्ट) | अलग-अलग रिपोर्ट्स में $100 मिलियन से $170 मिलियन के बीच बताई गई है |
अक्टूबर 2023 तक की एक रिपोर्ट के अनुसार Inshorts ने अब तक करीब $119 मिलियन जुटाए थे, जबकि जनवरी 2025 के एक कंपनी वक्तव्य में “पिछले एक दशक में $170 मिलियन का निवेश” बताया गया। यह अंतर संभवतः अलग-अलग समयबिंदुओं और गणना के तरीकों की वजह से है — इसे एक निश्चित आंकड़े के बजाय एक व्यापक सीमा की तरह समझना बेहतर होगा।
क्या Inshorts मुनाफे में है?
वित्त वर्ष 2022–23 (FY23) में Inshorts का ऑपरेटिंग रेवेन्यू पिछले साल के मुक़ाबले करीब 9% बढ़कर लगभग ₹181 करोड़ हो गया। इसी दौरान कंपनी का नेट लॉस करीब 33% बढ़कर लगभग ₹310 करोड़ पहुँच गया — यानी घाटा रेवेन्यू ग्रोथ से कहीं तेज़ी से बढ़ा।[7]
रेवेन्यू में मामूली बढ़ोतरी के मुक़ाबले घाटे का तेज़ी से बढ़ना बताता है कि उस साल कंपनी ने विस्तार, तकनीक या मार्केटिंग पर भारी खर्च किया होगा। यह भारत की कई कंज़्यूमर-इंटरनेट कंपनियों में एक आम पैटर्न रहा है — पहले ग्रोथ, बाद में मुनाफे पर फोकस।
अज़हर इक़बाल के 11 साल के CEO कार्यकाल के दौरान कंपनी 10 मिलियन से ज़्यादा एक्टिव यूज़र्स तक पहुँची और भारत के सबसे पहचाने जाने वाले अंग्रेज़ी न्यूज़ ऐप्स में गिनी जाने लगी — भले ही मुनाफे का सवाल कई सालों तक अनसुलझा रहा।
CEO से चेयरमैन तक: नेतृत्व में एक सोचा-समझा बदलाव
अज़हर इक़बाल ने 2013 से 2024 तक — यानी लगातार 11 साल — Inshorts के CEO के तौर पर कंपनी का नेतृत्व किया। अप्रैल 2024 में उन्होंने एक बड़ा फ़ैसला लिया: CEO का पद छोड़कर चेयरमैन की भूमिका में जाना, और अपने सह-संस्थापक दीपित पुरकायस्थ को नया CEO बनाना।[3]
यह बदलाव उसी साल की शुरुआत में हुआ, जब अज़हर ने Shark Tank India सीज़न 3 में जज के तौर पर डेब्यू किया था — यानी सार्वजनिक तौर पर उनकी पहचान और भी बढ़ रही थी, ठीक उसी दौर में जब उन्होंने कंपनी के रोज़मर्रा के कामकाज से दूरी बनानी शुरू की।
कई फाउंडर-चलित कंपनियों में एक समय ऐसा आता है जब संस्थापक ब्रांड का सार्वजनिक चेहरा तो बना रहता है, पर रोज़मर्रा का प्रबंधन किसी और को सौंप देता है। अज़हर इक़बाल का चेयरमैन बनना और लगभग साथ ही Fenado AI जैसी नई कंपनी शुरू करना, यह दिखाता है कि वे अपनी ऊर्जा एक परिपक्व कंपनी के प्रबंधन से हटाकर एक नए, शुरुआती चरण के आइडिया में लगाना चाहते थे।
Shark Tank India ने अज़हर इक़बाल को घर-घर पहचाना जाने वाला चेहरा कैसे बनाया
अक्टूबर 2023 में अज़हर इक़बाल को Shark Tank India के तीसरे सीज़न के लिए नए जज के तौर पर घोषित किया गया — उसी सीज़न में जॉमैटो के दीपिंदर गोयल, OYO के रितेश अग्रवाल और एडलवाइज़ MF की राधिका गुप्ता जैसे नाम भी नए जज के तौर पर शामिल हुए। सीज़न 3 का प्रसारण जनवरी–मार्च 2024 में हुआ।
वे इसके बाद सीज़न 4 (जनवरी–मार्च 2025) में भी जज की भूमिका में नज़र आए। शो के ज़रिए उन्होंने कई स्टार्टअप्स में निवेश किया, जिनमें रिपोर्ट्स के अनुसार Chefling, Mintree और Aroleap जैसे नाम शामिल हैं।
Shark Tank India का सीज़न 5 जनवरी 2026 में शुरू हुआ था। इस सीज़न के जजों की आधिकारिक और हाल की सूची में अज़हर इक़बाल का नाम नहीं है। हालांकि कुछ वेबसाइटें उन्हें अब भी “Shark” के रूप में दिखाती हैं। इसलिए सीज़न 5 में उनकी भूमिका को लेकर अभी कोई स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
Shark Tank India ने अज़हर इक़बाल को सिर्फ़ “Inshorts के फाउंडर” से आगे बढ़ाकर एक व्यापक बिज़नेस मेंटॉर की पहचान दी — ख़ासकर उन युवाओं के बीच, जो टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप की दुनिया में करियर बनाना चाहते हैं।
एंजेल निवेश और Fenado AI: Inshorts के बाद अगला अध्याय
अज़हर इक़बाल एक सक्रिय एंजेल इन्वेस्टर भी रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने अप्रैल 2023 में AI-आधारित कस्टमर-सर्विस स्टार्टअप QuickReply.ai में निवेश किया था — यह Shark Tank India से अलग, उनका निजी निवेश था।
जनवरी 2025 में उन्होंने अपना नया वेंचर Fenado AI लॉन्च किया — Inshorts में टेक्नोलॉजी हेड रह चुके मनीष सिंह बिष्ट के साथ मिलकर। Fenado AI एक “नो-कोड” AI प्लेटफॉर्म है, जो किसी को भी — बिना कोडिंग सीखे — सिर्फ़ चैट के ज़रिए अपनी ज़रूरत बताकर पूरी वेबसाइट या ऐप बनाने की सुविधा देता है।[4]
Fenado AI बीटा फेज़ में “Cades AI” नाम से जानी जाती थी, जनवरी 2025 में सार्वजनिक लॉन्च के समय इसका नाम बदलकर “Fenado AI” रखा गया।[8]
कंपनी के अनुसार, पहले महीने में उसका रेवेन्यू करीब ₹3 लाख था, जिसके अगले महीने ₹20 लाख से ऊपर पहुँचने का अनुमान जताया गया था। अज़हर इक़बाल का कहना है कि उनका लक्ष्य है कि बिना तकनीकी टीम के भी कोई भी छोटा व्यापारी — जैसे एक सब्ज़ी विक्रेता — अपना डिजिटल प्लेटफॉर्म बना सके।
अज़हर इक़बाल की नेट वर्थ कितनी है?
इंटरनेट पर अज़हर इक़बाल की नेट वर्थ को लेकर कई दावे मिलते हैं, पर इनमें से किसी की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
ज़्यादातर वेबसाइटें उनकी नेट वर्थ करीब ₹500 करोड़ बताती हैं, जो Inshorts में उनकी अनुमानित इक्विटी हिस्सेदारी (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार करीब 30%) और कंपनी की अनुमानित वैल्यूएशन (₹3,700 करोड़ से $550 मिलियन तक अलग-अलग रिपोर्ट में) पर आधारित हैं। एक अन्य रिपोर्ट में यह आंकड़ा करीब $58.5 मिलियन (लगभग ₹480–500 करोड़) बताया गया है — यानी अलग-अलग स्रोत लगभग समान सीमा में आते हैं, फिर भी कोई भी आंकड़ा किसी नियामक संस्था या कंपनी द्वारा आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं है।
सबसे सटीक निष्कर्ष यही है: उनकी वास्तविक नेट वर्थ का कोई आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है, और सभी उपलब्ध आंकड़े केवल मीडिया अनुमान हैं।
Inshorts से पहचान, फिर राष्ट्रीय मंचों तक
Inshorts की सफलता और एक युवा उद्यमी के तौर पर उनके योगदान के लिए अज़हर इक़बाल को कई सूचियों और सम्मानों में जगह मिली।
| सम्मान / सूची | महत्व |
|---|---|
| Forbes India 30 Under 30 | भारत के प्रभावशाली युवा उद्यमियों की सूची में शामिल |
| Fortune India 40 Under 40 | देश के उभरते बिज़नेस लीडर्स में पहचान |
| Business World 40 Under 40 | प्रभावशाली युवा बिज़नेस लीडर्स की सूची |
| Business World Young Entrepreneur Award | युवा उद्यमी के रूप में योगदान के लिए सम्मान |
| IIT Delhi Alumni Award for Entrepreneurship | अपने पूर्व संस्थान से उद्यमिता में योगदान के लिए मान्यता |
इनमें से कुछ सूचियां और सम्मान मीडिया संस्थानों व निजी संगठनों द्वारा दिए जाते हैं, न कि किसी सरकारी संस्था द्वारा। इन्हें उद्योग में मिली पहचान के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि किसी आधिकारिक प्रमाणन के तौर पर।
अज़हर इक़बाल से जुड़े 20 रोचक तथ्य
- वे बिहार के किशनगंज ज़िले से हैं — एक ऐसा इलाका जो आमतौर पर बड़े स्टार्टअप फाउंडर्स के लिए नहीं जाना जाता।
- उन्होंने IIT दिल्ली में इंटीग्रेटेड M.Tech प्रोग्राम में एडमिशन लिया था, जो सामान्य B.Tech से अलग, पांच साल का इंटीग्रेटेड कोर्स होता है।
- Inshorts का पहला वर्ज़न एक ऐप नहीं, बल्कि एक फेसबुक पेज था।
- शुरुआती दौर में कंपनी को Times Internet के TLabs एक्सेलरेटर से मात्र ₹10 लाख की फंडिंग मिली थी।
- Inshorts का नाम शुरुआत में “News in Shorts” था, जिसे 2015 में छोटा करके “Inshorts” किया गया।
- 2016 में कंपनी ने हिंदी वर्ज़न लॉन्च किया, ताकि तियर-2 और तियर-3 शहरों तक पहुँच बढ़े।
- Inshorts के तीनों सह-संस्थापक — अज़हर, दीपित और अनुनय — IIT से जुड़े रहे हैं, दो IIT दिल्ली से और एक IIT खड़गपुर से।
- उन्होंने Sachin Bansal (Flipkart के सह-संस्थापक) से प्रेरणा मिलने की बात कई इंटरव्यूज़ में कही है।
- Inshorts में निवेश करने वालों में Tiger Global और Vy Capital जैसे वैश्विक नाम शामिल रहे हैं।
- Public App, Inshorts की तरह ही एक अलग प्रोडक्ट है, न कि Inshorts का ही कोई फीचर।
- 2021 तक Inshorts की वैल्यूएशन करीब $550 मिलियन आंकी गई थी।
- अज़हर इक़बाल ने अक्टूबर 2023 में Shark Tank India के जज के तौर पर डेब्यू किया।
- 11 साल CEO रहने के बाद उन्होंने अप्रैल 2024 में यह पद छोड़ा।
- उनकी जगह दीपित पुरकायस्थ, जो शुरू से ही सह-संस्थापक रहे हैं, नए CEO बने।
- जनवरी 2025 में उन्होंने Inshorts के पूर्व टेक हेड मनीष सिंह बिष्ट के साथ मिलकर Fenado AI शुरू की।
- Fenado AI बीटा फेज़ में “Cades AI” नाम से जानी जाती थी।
- Fenado AI एक “नो-कोड” प्लेटफॉर्म है, जहां कोई भी सिर्फ़ चैट के ज़रिए वेबसाइट या ऐप बना सकता है।
- Inshorts प्रतिस्पर्धा में मुख्यतः Ver Se Innovation के DailyHunt से मुक़ाबला करता है।
- रिपोर्ट्स के अनुसार, वे यात्रा और ड्राइविंग के शौकीन हैं और दोस्तों के साथ रोड ट्रिप पर जाना पसंद करते हैं।
- सार्वजनिक जानकारी के अनुसार वे अब तक अविवाहित हैं।
चुनौतियां, विवाद और सार्वजनिक रूप से सामने आई मुश्किलें
एक संतुलित जीवनी सिर्फ़ सफलता की बात नहीं करती। अज़हर इक़बाल और Inshorts से जुड़ी कुछ चुनौतियां सार्वजनिक रिपोर्ट्स में दर्ज हैं:
- पारिवारिक विरोध — IIT छोड़ने के फ़ैसले को उनके परिवार और आसपास के लोगों ने शुरू में स्वीकार नहीं किया था।
- कोविड-19 का दौर — महामारी के दौरान यूज़र व्यवहार और विज्ञापन बाज़ार में बदलाव ने Inshorts जैसी कंज़्यूमर-इंटरनेट कंपनियों के लिए चुनौतियां खड़ी कीं।
- बढ़ता घाटा — FY23 में रेवेन्यू ग्रोथ (9%) के मुक़ाबले नेट लॉस कहीं ज़्यादा तेज़ी से (33%) बढ़ा।
- न्यूज़ प्लेटफॉर्म की सीमाएं — कई डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स की तरह Inshorts को भी कंटेंट की विश्वसनीयता और गहराई को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा है — यह पूरे उद्योग से जुड़ी एक व्यापक चुनौती है, न कि सिर्फ़ इस कंपनी की।
- नेतृत्व परिवर्तन — अप्रैल 2024 में CEO पद छोड़ना एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव था, जिसके लिए कंपनी के भीतर और बाहर, दोनों जगह समायोजन ज़रूरी हुआ।
तेज़ ग्रोथ और मज़बूत ब्रांड पहचान भी घाटे और आंतरिक बदलावों से अछूते नहीं होते। यह पैटर्न सिर्फ़ Inshorts तक सीमित नहीं — भारत की कई कंज़्यूमर-इंटरनेट कंपनियों की कहानी में यह आम है।
Inshorts ने भारत में खबरें पढ़ने के तरीके को कैसे बदला
अज़हर इक़बाल की पहचान सिर्फ़ Inshorts के सह-संस्थापक तक सीमित नहीं है। उन्होंने दिखाया कि एक छोटे शहर से आया विचार भी देश की डिजिटल आदतों को बदल सकता है।
अज़हर इक़बाल और Inshorts के बारे में सबसे ज़्यादा फैले 12 मिथक
क्या अज़हर इक़बाल IIT ग्रेजुएट हैं?
क्या Inshorts हमेशा से इसी नाम से जाना जाता था?
क्या Public App और Inshorts एक ही प्रोडक्ट हैं?
क्या अज़हर इक़बाल अभी भी Inshorts के CEO हैं?
क्या उनकी नेट वर्थ का कोई आधिकारिक आंकड़ा है?
क्या Inshorts को अकेले अज़हर इक़बाल ने शुरू किया था?
क्या Fenado AI, Inshorts का ही एक प्रोडक्ट है?
क्या वे Shark Tank India के सबसे युवा शार्क रहे हैं?
क्या Inshorts हमेशा से मुनाफे में रही है?
क्या Inshorts भारत की इकलौती शॉर्ट-न्यूज़ ऐप है?
क्या अज़हर इक़बाल का जन्म पंजाब में हुआ था?
क्या वे Inshorts पूरी तरह छोड़ चुके हैं?
इन जीवनियों को पढ़कर आप Inshorts जैसे भारतीय स्टार्टअप्स, प्रमुख उद्यमियों और Shark Tank India के जजों के जीवन, करियर, निवेश और सफलता की प्रेरणादायक कहानियों के बारे में विस्तार से जान सकते हैं।
फुटनोट एवं तथ्य संदर्भ
स्रोत एवं संदर्भ
यह जीवनी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध एवं सत्यापित स्रोतों — कंपनी फाइलिंग (DRHP), सेबी दस्तावेज़, IDC रिपोर्ट्स, आधिकारिक कंपनी घोषणाएँ, विश्वसनीय समाचार संस्थान, सार्वजनिक इंटरव्यू और उद्योग अनुसंधान — के आधार पर तैयार की गई है। जहाँ विभिन्न स्रोतों में मतभेद या अनुमान मौजूद हैं (जैसे नेट वर्थ, कंपनी वैल्यूएशन या अन्य सार्वजनिक दावे), वहाँ उन्हें स्पष्ट रूप से मीडिया अनुमान के रूप में दर्शाया गया है और सत्यापित तथ्यों से अलग रखा गया है।
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अंतिम अपडेट: जुलाई 2026 | संपादकीय समीक्षा: पूर्ण | तथ्य सत्यापन: आधिकारिक दस्तावेज़, सार्वजनिक स्रोत एवं उद्योग रिपोर्ट्स के आधार पर

