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पीयूष बंसल की जीवनी , Lenskart के संस्थापक, Shark Tank India जज, नेट वर्थ, शिक्षा, सफलता की कहानी और रोचक तथ्य

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पीयूष बंसल: Microsoft से Lenskart तक | पूरी जीवनी 2026
जीवनी · 2026 संस्करण · तथ्य-सत्यापित

पीयूष बंसल

जन्म 26 अप्रैल 1985 · दिल्ली · सह-संस्थापक व CEO, Lenskart · “एक असफल स्टार्टअप से भारत की सबसे बड़ी आईवियर कंपनी तक की यात्रा”
जन्म26 अप्रैल 1985 · दिल्ली, भारत
कंपनीLenskart Solutions Limited
भूमिकासह-संस्थापक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)
मीडियाShark Tank India जज
सार्वजनिक स्रोत सत्यापित अंतिम अपडेट: जुलाई 2026 स्रोत: कंपनी फाइलिंग (RHP) · NSE/BSE डेटा · समकालीन मीडिया
तथ्य-जाँच सार्वजनिक स्रोत आधारित राजनीतिक तटस्थता तथ्य, अनुमान और विश्लेषण अलग-अलग चिह्नित
पीयूष बंसल (Peyush Bansal) – Lenskart के सह-संस्थापक, CEO और Shark Tank India के जज
पीयूष बंसल (1985–) Lenskart के सह-संस्थापक, चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर (MD), CEO और Shark Tank India के लोकप्रिय जज एवं एंजेल निवेशक। उन्होंने Lenskart को भारत की सबसे बड़ी आईवियर कंपनियों में से एक बनाया और भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

Microsoft की चमकदार नौकरी छोड़कर एक कैंपस वेबसाइट से शुरू हुआ सफर

पीयूष बंसल के पास वह सब कुछ था जो किसी भी युवा इंजीनियर का सपना होता है — McGill University से इंजीनियरिंग की डिग्री और Microsoft के सिएटल दफ़्तर में एक अच्छी नौकरी। ज़्यादातर लोग यहीं ठहर जाते।

उन्होंने वह आरामदायक नौकरी छोड़ी, भारत लौटे, और एक कॉलेज-स्टूडेंट वेबसाइट शुरू की जो कुछ ही महीनों में बंद हो गई। यहीं से कहानी दिलचस्प होती है — इसी असफलता ने उन्हें उस समस्या तक पहुँचाया जो आगे चलकर Lenskart बनी, और जिसने भारत में चश्मा खरीदने के तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया।

⏱️ 60 सेकंड में पूरी कहानी

McGill University से इंजीनियरिंग → Microsoft, सिएटल में प्रोग्राम मैनेजर → 2007 में भारत वापसी → SearchMyCampus (असफल) → IIM बैंगलोर से मैनेजमेंट डिग्री → 2010 में अमित चौधरी व सुमित कपाही के साथ Valyoo Technologies के तहत Lenskart की स्थापना → ऑनलाइन कॉन्टैक्ट लेंस से शुरुआत, फिर चश्मे व सनग्लासेज़ तक विस्तार → 2019 में यूनिकॉर्न बनी → 2022 में जापान की Owndays का अधिग्रहण → 2021 से Shark Tank India में जज → नवंबर 2025 में BSE व NSE पर लिस्टिंग।


⚡ त्वरित जीवन परिचय
पूरा नामपीयूष बंसल
जन्म26 अप्रैल 1985, नई दिल्ली, भारत[1]
पेशाउद्यमी, एंजेल इन्वेस्टर, टीवी पर्सनैलिटी
पिताबलकिशन बंसल (चार्टर्ड अकाउंटेंट)
माताकिरण बंसल (गृहिणी)
भाई-बहनएक बड़ा भाई; बहन नेहा बंसल
स्कूलडॉन बॉस्को स्कूल, दिल्ली
कॉलेजMcGill University, मॉन्ट्रियल, कनाडा (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, 2002–2006)[6]
उच्च शिक्षाइंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM), बैंगलोर
Microsoft करियरप्रोग्राम मैनेजर, सिएटल (करीब 2006–07)
कंपनीLenskart (पैरेंट: Lenskart Solutions Limited, पूर्व नाम Valyoo Technologies)
सह-संस्थापकअमित चौधरी, सुमित कपाही
पदसह-संस्थापक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)
जीवनसाथीनिधि मित्तल (विवाह: 12 जून 2011)
संतानएक पुत्र — इवान बंसल (जन्म 2020)
Shark Tank Indiaजज व निवेशक — सीज़न 1 से अब तक
लिस्टिंगNSE व BSE पर 10 नवंबर 2025 को सूचीबद्ध[2]

दिल्ली से मॉन्ट्रियल, सिएटल, और वापस दिल्ली: पूरा सफर एक नज़र में

1985
जन्म — 26 अप्रैल, नई दिल्ली, एक मध्यवर्गीय परिवार में।
बचपन
दिल्ली के डॉन बॉस्को स्कूल में पढ़ाई; IIT की तैयारी की, पर प्रवेश परीक्षा में सफल नहीं हुए।
2002
McGill University, कनाडा में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (IT, कंट्रोल व ऑटोमेशन) में दाखिला।
2002–06
McGill में पढ़ाई के दौरान पार्ट-टाइम रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम किया; कोडिंग में रुचि विकसित हुई।
2006
McGill से स्नातक; British Association Medal से सम्मानित (स्रोतों में उल्लेखित)।
2006–07
Microsoft, सिएटल में प्रोग्राम मैनेजर के तौर पर करियर शुरू किया।
2007
Microsoft की नौकरी छोड़कर भारत लौटे — उद्यमिता में कदम रखने का फ़ैसला।
2008
Valyoo Technologies के तहत SearchMyCampus.com लॉन्च — दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए क्लासिफाइड वेबसाइट, करीब ₹25 लाख के शुरुआती निवेश से।
2008 (बाद में)
SearchMyCampus बंद; IIM बैंगलोर में मैनेजमेंट पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया।
2010
अमित चौधरी व सुमित कपाही के साथ मिलकर Lenskart.com की शुरुआत — ऑनलाइन कॉन्टैक्ट लेंस बिक्री से।
2011
Chiratae Ventures (तब IDG Ventures) से Series A फंडिंग; निधि मित्तल से विवाह (12 जून)।
2012
कंपनी का विस्तार चश्मों (eyeglasses) और सनग्लासेज़ की बिक्री तक हुआ।
2014
TPG व TR Capital से Series C फंडिंग; कंपनी ने ऑफलाइन स्टोर्स के लिए “एंडलेस-आइल” मॉडल अपनाया।
2016
Series D (IFC) व Series E (Premji Invest, Steadview) फंडिंग राउंड।
2019
दिसंबर में SoftBank Vision Fund से करीब $275 मिलियन का निवेश — Lenskart यूनिकॉर्न (मूल्यांकन $1 बिलियन+) बनी[4]
2020
पुत्र इवान का जन्म।
2021
Shark Tank India सीज़न 1 में जज के तौर पर पदार्पण; KKR व Temasek/Alpha Wave से नई फंडिंग।
2022
जापान की आईवियर कंपनी Owndays में बहुसंख्यक हिस्सेदारी करीब $400 मिलियन में अधिग्रहीत; Series I फंडिंग राउंड में मूल्यांकन $4.5 बिलियन तक पहुँचा[4]
2023
Abu Dhabi Investment Authority (ADIA) से $500 मिलियन का निवेश, उसी $4.5 बिलियन मूल्यांकन पर[5]
2024
Temasek व Fidelity से करीब $200 मिलियन का सेकेंडरी निवेश, मूल्यांकन करीब $5 बिलियन[5]
2025 (अप्रैल)
Fidelity द्वारा आंतरिक मूल्यांकन करीब $6.1 बिलियन आँका गया।
2025 (अक्टूबर)
Lenskart का IPO 31 अक्टूबर से 4 नवंबर तक खुला; ₹382–₹402 प्राइस बैंड, कुल इश्यू ₹7,278 करोड़; 28.26 गुना ओवरसब्सक्राइब्ड[3]
10 नवंबर 2025
NSE व BSE पर लिस्टिंग — शेयर इश्यू प्राइस से हल्की छूट पर खुले, फिर दिन के अंत तक इश्यू प्राइस से ऊपर बंद हुए[2]
2025–26
स्पेन की ब्रांड Meller में करीब 80% हिस्सेदारी का अधिग्रहण; हैदराबाद में बड़े पैमाने की नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी पर काम जारी।
2026
कंपनी की ग्रूमिंग पॉलिसी को लेकर सार्वजनिक विवाद; बाद में कंपनी ने संशोधित, समावेशी नीति जारी की[7]

वह छात्र जो IIT में नहीं पहुँच सका, पर McGill होते हुए Microsoft तक पहुँच गया

पीयूष बंसल का जन्म 26 अप्रैल 1985 को दिल्ली के एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ[1]। उनकी स्कूली पढ़ाई डॉन बॉस्को स्कूल, दिल्ली से हुई, जहाँ वे एक अच्छे छात्र माने जाते थे।

स्कूल के बाद उन्होंने IIT की प्रवेश परीक्षा की तैयारी की, लेकिन वे इसे पास नहीं कर सके। यह उनके शुरुआती जीवन की पहली बड़ी असफलता थी — मगर आगे चलकर यही मोड़ उन्हें एक अलग, बेहतर रास्ते की ओर ले गया।

क्या आप जानते हैं

IIT में दाखिला न मिलने के बाद पीयूष बंसल ने विदेश में इंजीनियरिंग पढ़ने का रास्ता चुना। यही फ़ैसला उन्हें McGill University, कनाडा तक ले गया — और वहीं से आगे Microsoft और अंततः Lenskart का रास्ता खुला।

2002 में उन्होंने McGill University में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (IT, कंट्रोल व ऑटोमेशन विशेषज्ञता) में दाखिला लिया[6]। पढ़ाई के दौरान वे पार्ट-टाइम रिसेप्शनिस्ट के तौर पर भी काम करते थे — यहीं उनकी कोडिंग और तकनीक में दिलचस्पी और गहरी हुई। 2006 में उन्होंने अपनी डिग्री पूरी की।

यह क्यों मायने रखता है

एक असफल प्रवेश परीक्षा किसी की क़ाबिलियत का आख़िरी फ़ैसला नहीं होती। पीयूष बंसल की कहानी दिखाती है कि रास्ता बदलने से मंज़िल नहीं बदलती — बल्कि कभी-कभी वह और बेहतर बन जाती है।

परिवार और निजी जीवन

पीयूष बंसल के पिता बलकिशन बंसल पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, और माता किरण बंसल गृहिणी हैं। उनका एक बड़ा भाई और एक बहन — नेहा बंसल — भी है।

12 जून 2011 को उन्होंने निधि मित्तल से विवाह किया। निधि पत्रकारिता और सार्वजनिक स्वास्थ्य पृष्ठभूमि से हैं और पहले India Today व The Pioneer जैसे संस्थानों से जुड़ी रहीं। वे वर्तमान में Lenskart Foundation की चेयरपर्सन हैं, जो मुफ़्त नेत्र जांच और किफायती चश्मों के ज़रिए अंधता रोकथाम पर काम करती है। दंपति का एक पुत्र है — इवान बंसल, जिनका जन्म 2020 में हुआ।

पारिवारिक साझेदारी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IPO फाइलिंग में निधि मित्तल भी Lenskart में एक शेयरधारक के तौर पर दर्ज हैं और उन्होंने OFS (ऑफर फॉर सेल) के ज़रिए अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा भी बेचा[7]। इससे पता चलता है कि Lenskart की यात्रा एक पारिवारिक प्रयास भी रही है, सिर्फ़ एक व्यक्ति की नहीं।


Microsoft: वह नौकरी जो सिखाकर छोड़ी गई

McGill से स्नातक होने के बाद पीयूष बंसल को Microsoft के सिएटल (रेडमंड) कैंपस में प्रोग्राम मैनेजर की नौकरी मिली[6]। यह ज़्यादातर इंजीनियरिंग छात्रों के लिए एक सपने जैसा मौक़ा था — दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक, अच्छी सैलरी, और स्थिर भविष्य।

यहाँ उन्होंने प्रोडक्ट डेवलपमेंट, यूज़र एक्सपीरियंस और बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स चलाने की गहरी समझ हासिल की — एक ऐसी ट्रेनिंग जो आगे चलकर Lenskart के डिजिटल-फर्स्ट मॉडल की नींव बनी।

संपादकीय विश्लेषण

Microsoft में बिताया गया समय भले ही एक साल के आसपास रहा हो, लेकिन इसने पीयूष बंसल को बड़े पैमाने पर प्रोडक्ट सोचने, ग्राहक अनुभव को प्राथमिकता देने और टेक्नोलॉजी को बिज़नेस समस्याओं पर लागू करने का तरीका सिखाया — यही सोच आगे चलकर Lenskart के “होम आई-चेकअप” और “3D ट्राय-ऑन” जैसे इनोवेशन में दिखी।

2007 में उन्होंने एक बड़ा फ़ैसला लिया — एक स्थिर, ऊँची सैलरी वाली नौकरी छोड़कर भारत वापस लौटना, ताकि वे अपना कुछ शुरू कर सकें। यह फ़ैसला उस समय जोखिम भरा लगा, लेकिन आज यह उनकी सबसे बड़ी सफलता की नींव माना जाता है।

SearchMyCampus: वह असफलता जिसने असली रास्ता दिखाया

भारत लौटने के बाद पीयूष बंसल ने Valyoo Technologies नाम की कंपनी बनाई और 2008 में SearchMyCampus.com लॉन्च की — एक क्लासिफाइड वेबसाइट, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों को हॉस्टल, पार्ट-टाइम नौकरियां और कैंपस से जुड़ी अन्य जानकारी खोजने में मदद करती थी।

यह वेंचर करीब ₹25 लाख के शुरुआती निवेश से शुरू हुआ। शुरुआत में छात्रों के बीच इसे कुछ पहचान भी मिली, लेकिन बिज़नेस मॉडल टिकाऊ साबित नहीं हुआ और कुछ ही महीनों में कंपनी को बंद करना पड़ा।

क्या आप जानते हैं

Lenskart से पहले, पीयूष बंसल एक कॉलेज-क्लासिफाइड वेबसाइट के फाउंडर थे — जो हॉस्टल और पार्ट-टाइम जॉब खोजने में मदद करती थी, चश्मों से इसका कोई संबंध नहीं था।

SearchMyCampus क्यों असफल रहा?

  • सीमित बाज़ार — सिर्फ़ कॉलेज छात्रों तक सीमित मॉडल, जिसमें भुगतान करने की क्षमता कम थी।
  • अस्पष्ट रेवेन्यू मॉडल — विज्ञापन आधारित कमाई पर्याप्त पूंजी नहीं जुटा सकी।
  • समय की कमी — तेज़ी से बदलते बाज़ार में मज़बूत टीम और पूंजी दोनों की कमी रही।
इससे क्या सीख मिली

इस असफलता ने पीयूष बंसल को तीन चीज़ें सिखाईं — भारतीय ऑनलाइन ग्राहक कैसे सोचता और खरीदारी करता है, बड़े पैमाने पर बिज़नेस चलाने के लिए पूंजी और रणनीति दोनों की ज़रूरत होती है, और सबसे ज़रूरी — एक बड़ी, वास्तविक समस्या पर काम करना ज़्यादा टिकाऊ होता है। इसी सीख ने उन्हें IIM बैंगलोर में आगे पढ़ने और फिर एक बड़े बाज़ार — आईवियर — की ओर मोड़ा।


Lenskart की शुरुआत: कॉन्टैक्ट लेंस से एक अरबों डॉलर की कंपनी तक

SearchMyCampus बंद होने के बाद पीयूष बंसल ने IIM बैंगलोर में मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान उन्होंने भारत के ई-कॉमर्स बाज़ार को क़रीब से समझा — कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, किताबें — लगभग हर कैटेगरी ऑनलाइन बिक रही थी, लेकिन एक कैटेगरी लगभग अछूती थी: आईवियर (चश्मे और लेंस)

प्रेरणा — मीडिया साक्षात्कारों पर आधारित

कई साक्षात्कारों में पीयूष बंसल बताते हैं कि उन्हें एक रिपोर्ट से पता चला कि दुनिया के दृष्टिहीन लोगों में से करीब 40% भारत में हैं, और उनमें से बहुत से लोगों को सही चश्मा नहीं मिल पाता। यह आँकड़ा उनके साक्षात्कारों में बार-बार दोहराया गया है, हालांकि इसका मूल स्रोत स्पष्ट रूप से उद्धृत नहीं किया जाता, इसलिए इसे प्रेरणादायक कथा के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित आँकड़े के तौर पर।

2010 में उन्होंने अमित चौधरी और सुमित कपाही के साथ मिलकर Lenskart.com की शुरुआत की, जो शुरुआत में सिर्फ़ ऑनलाइन कॉन्टैक्ट लेंस बेचती थी। 2012 में कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो का विस्तार करते हुए चश्मे (eyeglasses) और सनग्लासेज़ की बिक्री भी शुरू की।

तीन सह-संस्थापक, तीन भूमिकाएं

व्यक्तिभूमिका
पीयूष बंसलसह-संस्थापक व CEO — विज़न, ब्रांडिंग, टेक्नोलॉजी रणनीति
अमित चौधरीसह-संस्थापक व COO — ऑपरेशन्स और सप्लाई चेन
सुमित कपाहीसह-संस्थापक — प्रोडक्ट व बिज़नेस डेवलपमेंट
संपादकीय विश्लेषण

भारत में चश्मा खरीदना पारंपरिक रूप से एक धीमा, महंगा और भरोसे पर आधारित अनुभव रहा है — स्थानीय ऑप्टिशियन तक जाना, हफ़्तों इंतज़ार करना। Lenskart ने इस पूरे अनुभव को ऑनलाइन लाकर, कीमतें घटाकर और डिलीवरी तेज़ करके एक नई श्रेणी बनाई — जहाँ चश्मा सिर्फ़ ज़रूरत नहीं, एक स्टाइल स्टेटमेंट भी बन सका।

“चश्मे को ज़रूरत से स्टाइल तक ले जाना — यही Lenskart की सबसे बड़ी पोज़िशनिंग रणनीति रही।”

संपादकीय सार

पहली फंडिंग और शुरुआती चुनौतियां

Lenskart के शुरुआती साल आसान नहीं थे। ऑनलाइन चश्मा बेचना एक अनोखी चुनौती थी — ग्राहक बिना ट्राय किए चश्मा खरीदने से हिचकिचाते थे, और पावर (नंबर) से जुड़ी ग़लतियों का डर हमेशा बना रहता था।

2011 में कंपनी को Chiratae Ventures (तब IDG Ventures India) से पहली संस्थागत फंडिंग मिली[4]। इस शुरुआती पूंजी ने कंपनी को टेक्नोलॉजी और लॉजिस्टिक्स में निवेश करने में मदद की।

  • भरोसे की चुनौती — बिना आज़माए चश्मा ऑनलाइन बेचना मुश्किल था।
  • डिलीवरी और सटीकता — सही पावर और फ्रेम फिटिंग सुनिश्चित करना ज़रूरी था।
  • ग्राहक शिक्षा — भारतीय ग्राहकों को ऑनलाइन आईवियर खरीदारी के लिए तैयार करना पड़ा।
समाधान

इन चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनी ने होम ट्रायल, आसान रिटर्न पॉलिसी और बाद में होम आई-चेकअप जैसी सुविधाएं शुरू कीं — जो आगे चलकर Lenskart की पहचान बन गईं।


Lenskart असल में कमाता कैसे है

Lenskart का बिज़नेस मॉडल एक वर्टिकली इंटीग्रेटेड ढांचे पर टिका है — यानी कंपनी डिज़ाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और रिटेल तक, हर परत को खुद नियंत्रित करती है।

परतक्या होता हैक्यों ज़रूरी
डिज़ाइन व ब्रांडिंगइन-हाउस फ्रेम डिज़ाइन, John Jacobs जैसे सब-ब्रांडमार्जिन का बड़ा हिस्सा यहीं बनता है
इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंगखुद की फैक्ट्रियों में फ्रेम व लेंस उत्पादनलागत और गुणवत्ता, दोनों पर नियंत्रण
ऑम्नीचैनल डिस्ट्रीब्यूशनवेबसाइट + ऐप + 2,700 से ज़्यादा स्टोरऑनलाइन व ऑफलाइन, दोनों ग्राहकों तक पहुंच
सब्सक्रिप्शन (Lenskart Gold)सदस्यता आधारित छूट व सेवाएंबार-बार खरीदारी और ग्राहक जुड़ाव बढ़ाता है
सरल भाषा मेंज़्यादातर कंपनियां या तो पूरी तरह ऑनलाइन होती हैं या पूरी तरह ऑफलाइन। Lenskart ने दोनों को जोड़ा — ग्राहक ऑनलाइन ऑर्डर कर सकता है, या स्टोर पर जाकर आँख की जांच करा सकता है, और फिर भी वही डिजिटल सप्लाई चेन ऑर्डर पूरा करती है।

राजस्व मुख्यतः प्रोडक्ट बिक्री (चश्मे, सनग्लासेज़, कॉन्टैक्ट लेंस) से आता है, साथ ही सब्सक्रिप्शन फीस, फ्रैंचाइज़ी फीस और इंटरनेशनल बिज़नेस (Owndays, Meller) से भी अहम हिस्सा आता है। FY25 में कंपनी ने ₹297 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया[4] — जो दर्शाता है कि कंपनी घाटे से मुनाफ़े की ओर बढ़ चुकी है।

टेक्नोलॉजी: भरोसे की समस्या को सॉफ्टवेयर से हल करना

Lenskart की सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से एक ही रही — ग्राहक बिना आज़माए चश्मा कैसे खरीदे? इसका जवाब कंपनी ने टेक्नोलॉजी में ढूंढा।

📘 Lenskart के प्रमुख टेक्नोलॉजी इनोवेशन
3D ट्राय-ऑनफ़ोन कैमरा के ज़रिए ग्राहक अपने चेहरे पर वर्चुअली फ्रेम आज़मा सकते हैं, खरीदने से पहले।
होम आई-चेकअपप्रशिक्षित ऑप्टोमेट्रिस्ट ग्राहक के घर जाकर मुफ़्त या सशुल्क आँख की जांच करते हैं।
AI-पावर्ड आई टेस्टडिवाइस और ऐप के ज़रिए तेज़, सटीक विज़न टेस्टिंग।
रोबोटिक मैन्युफैक्चरिंगजर्मनी से मंगाई गई सटीक मशीनरी से लेंस व फ्रेम उत्पादन में तेज़ी और गुणवत्ता।

ये इनोवेशन सिर्फ़ “कूल फीचर्स” नहीं थे — इनका सीधा मक़सद था ऑनलाइन खरीदारी में भरोसे की कमी को दूर करना, जो शुरुआती सालों में कंपनी की सबसे बड़ी बाधा थी।

ऑम्नीचैनल रणनीति: “एंडलेस-आइल” मॉडल

2014 के आसपास Lenskart ने छोटे शहरों में फिज़िकल स्टोर खोलना शुरू किया — लेकिन पारंपरिक रिटेलर की तरह नहीं। स्टोर में सीमित इन्वेंटरी रखने के बजाय, ग्राहक स्टोर में आकर पावर चेक करवाता और फ्रेम चुनता, और ऑर्डर स्टोर मैनेजर द्वारा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से ही प्लेस किया जाता।

इससे क्या फ़ायदा हुआ

इस मॉडल से स्टोर्स को बड़ी इन्वेंटरी नहीं रखनी पड़ती, डेडस्टॉक का जोखिम कम होता है, और फिर भी ग्राहक को फिज़िकल अनुभव — छूना, आज़माना — मिलता है। यही मॉडल Lenskart को ऑनलाइन ब्रांड्स और पारंपरिक ऑप्टिशियन, दोनों से अलग खड़ा करता है।

कंपनी ने स्थानीय ऑप्टिशियनों को प्रतिस्पर्धी के बजाय फ्रैंचाइज़ी पार्टनर बनने का मौक़ा भी दिया, जिससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में तेज़ी से विस्तार संभव हुआ।

मैन्युफैक्चरिंग: सिर्फ़ बेचना नहीं, खुद बनाना भी

ज़्यादातर आईवियर रिटेलर तैयार फ्रेम थर्ड-पार्टी से मंगाते हैं। Lenskart ने शुरू से ही इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग पर ज़ोर दिया, जिससे लागत और गुणवत्ता, दोनों पर बेहतर नियंत्रण मिला।

2,723
मार्च 2025 तक कुल स्टोर (भारत व विदेश)[4]
50 एकड़
हैदराबाद में निर्माणाधीन नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी
₹5,428 Cr
FY24 रेवेन्यू (करीब 43% वृद्धि)
₹297 Cr
FY25 शुद्ध लाभ
व्यावसायिक जोखिम

विश्लेषकों ने यह भी बताया है कि Lenskart की एक-तिहाई से ज़्यादा आपूर्ति (फ्रेम, मोल्ड, कच्चा माल) चीन से आती है — जो सप्लाई-चेन जोखिम पैदा करती है। हैदराबाद की नई फैसिलिटी इसी निर्भरता को घटाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

भारत से जापान, सिंगापुर और स्पेन तक

2022 में Lenskart ने जापान की प्रतिष्ठित आईवियर कंपनी Owndays में बहुसंख्यक हिस्सेदारी करीब $400 मिलियन में खरीदी[4] — यह कंपनी के अब तक के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय क़दमों में से एक था। इसके ज़रिए Lenskart को दक्षिण-पूर्व एशिया में सीधी मौजूदगी मिली।

2025 में कंपनी ने स्पेनिश आईवियर ब्रांड Meller में करीब 80% हिस्सेदारी भी खरीदी। आज कंपनी की करीब 40% कमाई भारत के बाहर से आती है, और सिंगापुर, दुबई सहित कई देशों में इसकी मौजूदगी है।

विस्तार की रणनीति

पीयूष बंसल का मानना है कि इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे बाज़ारों में उपभोक्ता व्यवहार वैसा ही है, जैसा भारत में करीब एक दशक पहले था — यही सोच कंपनी की दक्षिण-पूर्व एशिया विस्तार रणनीति के केंद्र में है।


फंडिंग यात्रा: $1 बिलियन से ज़्यादा जुटाने की कहानी

Lenskart ने अपनी यात्रा में कई दौर की फंडिंग जुटाई — शुरुआती वेंचर कैपिटल से लेकर सॉवरेन वेल्थ फंड्स तक[4]

दौरवर्षप्रमुख निवेशकमूल्यांकन / राशि
Series A2011Chiratae Ventures (IDG)शुरुआती वेंचर पूंजी
Series C2014TPG, TR Capitalविस्तार पूंजी
Series D2016IFC
Series E2016–18Premji Invest, Steadview
Series F2019Kedaara Capital
Series G2019SoftBank Vision Fund$275M · $1B+ (यूनिकॉर्न)
Secondary2021KKR$95M
Series G (विस्तार)2021Temasek, Alpha Wave$220M · $2.5B
Series H/I2022Alpha Wave Global$200M · $4.5B
Series I2023ADIA$500M · $4.5B
सेकेंडरी2024Temasek, Fidelity$200M · ~$5B
IPOनवंबर 2025सार्वजनिक बाज़ार₹7,278 Cr · ~$9–10B
सरल भाषा मेंकरीब 15 साल में Lenskart एक छोटे वेंचर-फंडेड स्टार्टअप से सॉवरेन वेल्थ फंड्स (ADIA, Temasek, SoftBank) के भरोसे वाली कंपनी बनी, और अंततः पब्लिक मार्केट तक पहुँची।

यूनिकॉर्न बनने का सफर

सत्यापित तथ्य

दिसंबर 2019 में SoftBank Vision Fund के करीब $275 मिलियन के निवेश के बाद Lenskart का मूल्यांकन $1 बिलियन के पार पहुँच गया, जिससे यह भारत की नई यूनिकॉर्न कंपनियों में शामिल हो गई[4]

इसके बाद के वर्षों में मूल्यांकन लगातार बढ़ता गया — 2021 में $2.5 बिलियन, 2022 में $4.5 बिलियन, 2024 में करीब $5 बिलियन, और अप्रैल 2025 में Fidelity के आंतरिक आकलन के अनुसार करीब $6.1 बिलियन[5]। नवंबर 2025 की IPO लिस्टिंग के समय कंपनी का बाज़ार पूंजीकरण करीब ₹70,000 करोड़ (लगभग $8 बिलियन के आसपास) दर्ज हुआ।

कुंजी सबक

यूनिकॉर्न बनना अंत नहीं, बल्कि एक पड़ाव था। असली परीक्षा तब शुरू हुई जब कंपनी को घाटे से मुनाफ़े की ओर, और निजी पूंजी से सार्वजनिक बाज़ार की जवाबदेही की ओर बढ़ना था।

Lenskart का IPO: शेयर बाजार में कंपनी की एंट्री

Lenskart ने 31 अक्टूबर से 4 नवंबर 2025 के बीच अपना IPO लॉन्च किया। कंपनी ने ₹382–₹402 प्रति शेयर का प्राइस बैंड रखा और कुल ₹7,278.76 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा। इसमें ₹2,150 करोड़ कंपनी के विस्तार के लिए थे, जबकि ₹5,128 करोड़ पुराने निवेशकों द्वारा अपने शेयर बेचने (OFS) के थे[3]

28.26x
IPO को 28 गुना से अधिक आवेदन मिले
₹402
अंतिम इश्यू प्राइस
10 नवम्बर 2025
NSE और BSE पर लिस्टिंग
₹70,000 Cr+
लिस्टिंग के समय अनुमानित मार्केट वैल्यू

लिस्टिंग के दिन शेयर की शुरुआत इश्यू प्राइस से थोड़ी कम रही। हालांकि, कारोबार के दौरान इसमें सुधार हुआ और दिन के अंत तक शेयर इश्यू प्राइस से ऊपर बंद हुआ[2][8]

आसान भाषा में

कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि कंपनी की वैल्यूएशन काफी ऊंची थी और मैन्युफैक्चरिंग पर ज्यादा खर्च भविष्य में चुनौती बन सकता है। वहीं कई विशेषज्ञों ने Lenskart को भारत का मजबूत और तेजी से बढ़ता उपभोक्ता ब्रांड बताया। इसलिए निवेश का फैसला हमेशा अपनी रिसर्च और वित्तीय सलाह के आधार पर ही लेना चाहिए।


पीयूष बंसल की लीडरशिप: ग्राहक की जरूरत सबसे पहले

पीयूष बंसल को एक शांत और समझदारी से फैसले लेने वाले बिजनेसमैन के रूप में जाना जाता है। वे हर बड़े निर्णय से पहले ग्राहक की जरूरत और उपलब्ध आंकड़ों (डेटा) पर ध्यान देते हैं।

  • ग्राहक पहले — होम आई टेस्ट, होम ट्रायल और आसान रिटर्न जैसी सुविधाएं ग्राहकों की परेशानी को कम करने के लिए शुरू की गईं।
  • डेटा के आधार पर फैसले — नया स्टोर कहां खुलेगा, कौन-सा प्रोडक्ट लॉन्च होगा और किस शहर में विस्तार करना है, इसका फैसला आंकड़ों के आधार पर किया जाता है।
  • भविष्य की सोच — शुरुआती वर्षों में मुनाफा कम होने के बावजूद कंपनी ने अपनी फैक्ट्री और नई तकनीक में लगातार निवेश किया।
क्या सीख मिलती है?

Lenskart की सफलता सिर्फ पीयूष बंसल की वजह से नहीं है। तीनों सह-संस्थापकों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियां अच्छी तरह निभाईं। पीयूष बंसल कंपनी का चेहरा भी हैं और उसके प्रमुख फैसले भी संभालते हैं। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।


Shark Tank India ने पीयूष बंसल को घर-घर में पहचान दिलाई

पीयूष बंसल Shark Tank India के पहले सीजन से जज हैं। वे शो के सबसे लोकप्रिय और सक्रिय निवेशकों में गिने जाते हैं। अलग-अलग सीजन में उन्होंने 50 से ज्यादा स्टार्टअप्स में निवेश किया है।

वे ऐसे बिजनेस में निवेश करना पसंद करते हैं जिनके पास अच्छा प्रोडक्ट, मजबूत टीम और लंबे समय तक सफल होने की क्षमता हो।

क्या आप जानते हैं?

Shark Tank India में पीयूष बंसल का “CA से दूर रहना” वाला मजाक काफी वायरल हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि उनके पिता खुद एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं।

सरल विश्लेषण

Shark Tank India की वजह से पीयूष बंसल सिर्फ Lenskart के संस्थापक ही नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक मेंटॉर भी बन गए। इससे Lenskart की लोकप्रियता और लोगों का भरोसा दोनों बढ़े। हालांकि, जब कंपनी किसी विवाद में आती है, तो उसका असर उनकी व्यक्तिगत छवि पर भी पड़ सकता है।


Lenskart के अलावा पीयूष बंसल ने किन कंपनियों में निवेश किया?

Lenskart के अलावा पीयूष बंसल एक सक्रिय एंजेल निवेशक भी हैं। उन्होंने Shark Tank India और निजी तौर पर कई स्टार्टअप्स में निवेश किया है। उनका फोकस ऐसे बिजनेस पर रहता है जिनमें आगे बढ़ने की अच्छी संभावना हो।

  • Shark Tank India में कई स्टार्टअप्स में निवेश किया।
  • DailyObjects जैसे कुछ उपभोक्ता (Consumer) ब्रांड्स में भी निवेश किया है।
  • इसके अलावा शिक्षा (Education), टेक्नोलॉजी और अन्य उभरते स्टार्टअप्स में भी निवेश किया है।
महत्वपूर्ण जानकारी

पीयूष बंसल ने किन-किन कंपनियों में निवेश किया है, इसकी पूरी आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं है। इंटरनेट पर कई अलग-अलग सूचियां मिलती हैं, इसलिए इस लेख में केवल उन्हीं निवेशों का उल्लेख किया गया है जिनकी जानकारी विश्वसनीय स्रोतों से मिलती है।


पीयूष बंसल की नेट वर्थ कितनी है?

पीयूष बंसल की नेट वर्थ को लेकर अलग-अलग वेबसाइटों पर अलग-अलग आंकड़े दिए गए हैं। कुछ रिपोर्ट्स इसे सैकड़ों करोड़ रुपये बताती हैं, जबकि कुछ के अनुसार उनकी संपत्ति इससे कहीं अधिक है[9]

ध्यान दें

पीयूष बंसल की कुल संपत्ति का कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है। उनकी अधिकांश संपत्ति Lenskart में उनकी हिस्सेदारी से जुड़ी है। इसलिए कंपनी की वैल्यू और शेयर कीमत बढ़ने या घटने के साथ उनकी नेट वर्थ भी बदल सकती है।

प्रश्न उत्तर
क्या आधिकारिक नेट वर्थ सार्वजनिक है? नहीं
उनकी सबसे बड़ी संपत्ति क्या है? Lenskart में उनकी हिस्सेदारी
क्या नेट वर्थ समय के साथ बदलती रहती है? हाँ, कंपनी की वैल्यू और शेयर कीमत के अनुसार।
क्या इंटरनेट पर दिए गए सभी आंकड़े सही हैं? नहीं, अधिकांश केवल अनुमान हैं।
सरल भाषा में

सीधे शब्दों में कहें तो पीयूष बंसल की असली नेट वर्थ का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए इंटरनेट पर दिखाई देने वाले आंकड़ों को केवल अनुमान माना जाना चाहिए, न कि अंतिम सत्य।


पीयूष बंसल को मिले प्रमुख सम्मान

वर्ष सम्मान क्यों मिला?
2006 British Association Medal (McGill University) पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए।
2010 Red Herring Top 100 Asia Valyoo Technologies को एशिया के उभरते स्टार्टअप्स में जगह मिली।
2012 Emerging Entrepreneur of the Year एक सफल युवा उद्यमी के रूप में सम्मानित किया गया।
2014 MarketingSherpa Email Award Lenskart की डिजिटल मार्केटिंग के लिए।
2015 India TV Yuva Award युवा बिजनेस लीडर के रूप में सम्मान।
2019 Fortune India 40 Under 40 भारत के 40 प्रभावशाली युवा बिजनेस लीडर्स में शामिल।
ध्यान दें

इंटरनेट पर पीयूष बंसल से जुड़े कई अन्य पुरस्कारों का भी उल्लेख मिलता है। लेकिन इस सूची में केवल वही सम्मान शामिल किए गए हैं जिनकी पुष्टि एक से अधिक विश्वसनीय स्रोतों से होती है।


पीयूष बंसल के बारे में 25 रोचक बातें

  • पीयूष बंसल IIT में प्रवेश नहीं ले पाए, लेकिन बाद में कनाडा जाकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
  • उन्होंने McGill University से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
  • पढ़ाई के दौरान उन्होंने पार्ट-टाइम नौकरी भी की।
  • करियर की शुरुआत Microsoft में की थी।
  • उन्होंने अच्छी नौकरी छोड़कर अपना स्टार्टअप शुरू करने का फैसला लिया।
  • Lenskart से पहले उन्होंने SearchMyCampus नाम का स्टार्टअप शुरू किया था।
  • शुरुआत में Lenskart सिर्फ ऑनलाइन कॉन्टैक्ट लेंस बेचती थी।
  • आज Lenskart चश्मे, सनग्लास और कॉन्टैक्ट लेंस सभी बेचती है।
  • Lenskart के तीन सह-संस्थापक हैं—पीयूष बंसल, अमित चौधरी और सुमित कपाही।
  • 2019 में SoftBank के निवेश के बाद Lenskart यूनिकॉर्न कंपनी बनी।
  • पीयूष बंसल Shark Tank India के पहले सीजन से जज हैं।
  • उन्होंने Shark Tank India में कई स्टार्टअप्स में निवेश किया है।
  • Lenskart आज भारत के अलावा कई देशों में भी कारोबार करती है।
  • कंपनी की अपनी आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी है।
  • Lenskart ग्राहकों को घर पर आई टेस्ट और होम ट्रायल जैसी सुविधाएं देती है।
  • कंपनी 3D Virtual Try-On जैसी तकनीक का उपयोग करती है।
  • 2022 में Lenskart ने जापान की Owndays कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी।
  • 2025 में कंपनी ने स्पेन के Meller ब्रांड में भी निवेश किया।
  • Lenskart के प्रमुख निवेशकों में SoftBank, Temasek, ADIA और KKR शामिल हैं।
  • IPO के समय कंपनी की वैल्यू हजारों करोड़ रुपये आंकी गई।
  • Lenskart का IPO निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा।
  • पीयूष बंसल की सबसे बड़ी ताकत ग्राहक की समस्या को समझना मानी जाती है।
  • वे डेटा के आधार पर फैसले लेने में विश्वास रखते हैं।
  • उनका लक्ष्य अच्छी गुणवत्ता वाले चश्मे सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराना है।
  • आज पीयूष बंसल भारत के सबसे सफल स्टार्टअप उद्यमियों में गिने जाते हैं।

Lenskart के सामने आई बड़ी चुनौतियां

आज Lenskart एक सफल कंपनी है, लेकिन यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। शुरुआत से लेकर आज तक कंपनी को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

  • ग्राहकों का भरोसा जीतना — शुरुआत में लोग ऑनलाइन चश्मा खरीदने से हिचकते थे।
  • बड़ी कंपनियों से मुकाबला — Titan Eye+, Specsmakers और GKB Opticals जैसे पुराने ब्रांड पहले से बाजार में मौजूद थे।
  • कोविड-19 का असर — महामारी के दौरान कई स्टोर बंद रहे, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ।
  • तेजी से विस्तार — पूरे भारत में एक जैसी गुणवत्ता और अच्छी सेवा बनाए रखना आसान नहीं था।
  • सप्लाई चेन — कुछ कच्चा माल और पार्ट्स विदेशों से आते थे, जिससे कभी-कभी सप्लाई में दिक्कत हुई।
  • शुरुआती नुकसान — कंपनी ने कई साल तक मुनाफे की जगह विस्तार और नई तकनीक पर ज्यादा निवेश किया।

पीयूष बंसल और Lenskart से जुड़े प्रमुख विवाद

पीयूष बंसल का करियर ज्यादातर सकारात्मक रहा है। हालांकि, कुछ मामलों में वे और Lenskart चर्चा का विषय भी बने।

2022

Shark Tank India के पहले सीजन में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) को लेकर की गई एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद कुछ लोगों ने उनकी आलोचना की। बाद में पीयूष बंसल ने अपनी बात स्पष्ट की और मामला शांत हो गया।

2026

2026 में Lenskart की एक पुरानी ग्रूमिंग गाइड सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इसमें धार्मिक प्रतीकों को लेकर कुछ नियमों पर सवाल उठे। विवाद बढ़ने के बाद कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह पुराना दस्तावेज था और बाद में नई नीति जारी की गई, जिसमें सभी धर्मों और संस्कृतियों के प्रतीकों की अनुमति दी गई[7]

ध्यान दें

दोनों मामलों में कंपनी ने सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की। किसी भी विवाद को समझने के लिए आधिकारिक बयान और विश्वसनीय समाचार स्रोतों को देखना सबसे बेहतर तरीका है।


वे असफलताएं जिन्होंने पीयूष बंसल को सफल बनाया

  • SearchMyCampus सफल नहीं हुआ — उनका पहला स्टार्टअप ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया, लेकिन इससे उन्हें स्टार्टअप चलाने का अनुभव मिला।
  • ऑनलाइन चश्मा बेचने की चुनौती — शुरुआत में लोगों को ऑनलाइन चश्मा खरीदने पर भरोसा नहीं था।
  • कई साल तक नुकसान — Lenskart ने लंबे समय तक मुनाफा कमाने की बजाय नई तकनीक, फैक्ट्री और स्टोर खोलने में निवेश किया।
  • हर चुनौती से सीख — पीयूष बंसल ने हर गलती से सीखा और उसी के आधार पर कंपनी को आगे बढ़ाया।

पीयूष बंसल की सफलता से क्या सीख मिलती है?

मुख्य सीख
  • असफलता से घबराने की बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
  • ऐसी समस्या चुनें जिसे करोड़ों लोग रोज़ महसूस करते हों।
  • ग्राहकों का भरोसा जीतना किसी भी बिजनेस की सबसे बड़ी ताकत है।
  • नई तकनीक अपनाने से बिजनेस तेजी से आगे बढ़ सकता है।
  • सिर्फ आज नहीं, आने वाले कई सालों को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए।
  • ईमानदारी, पारदर्शिता और ग्राहकों का सम्मान लंबे समय की सफलता की कुंजी है।

पीयूष बंसल ने भारतीय आईवियर इंडस्ट्री को कैसे बदला?

पीयूष बंसल ने यह साबित किया कि चश्मा केवल जरूरत की चीज़ नहीं, बल्कि स्टाइल और टेक्नोलॉजी का भी हिस्सा हो सकता है। आज Lenskart ने भारत में चश्मा खरीदने का तरीका बदल दिया है।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियां
चश्मा खरीदना आसान बनाया
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से खरीदारी की सुविधा दी।
नई तकनीक अपनाई
3D Try-On, Home Eye Test और AI जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया।
भारतीय ब्रांड को दुनिया तक पहुंचाया
Lenskart ने कई देशों में अपना कारोबार बढ़ाया।
भारत में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाई
देश में आधुनिक फैक्ट्रियां स्थापित कर उत्पादन बढ़ाया।
स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया
Shark Tank India के जरिए हजारों युवाओं को अपना बिजनेस शुरू करने की प्रेरणा दी।
असफलता से सफलता तक
पहले स्टार्टअप की असफलता को सीख बनाकर Lenskart जैसी बड़ी कंपनी खड़ी की।

पीयूष बंसल और Lenskart से जुड़े 15 आम भ्रम

इंटरनेट पर पीयूष बंसल और Lenskart के बारे में कई गलत जानकारियां भी मिलती हैं। यहां सबसे आम सवालों का सही जवाब दिया गया है।

क्या पीयूष बंसल IIT से पढ़े हैं?
सच: नहीं। उन्होंने कनाडा की McGill University से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
क्या Lenskart की शुरुआत चश्मे बेचने से हुई थी?
सच: नहीं। शुरुआत में कंपनी ऑनलाइन कॉन्टैक्ट लेंस बेचती थी। बाद में चश्मे और सनग्लास शामिल किए गए।
क्या पीयूष बंसल अकेले Lenskart के संस्थापक हैं?
सच: नहीं। Lenskart के तीन सह-संस्थापक हैं—पीयूष बंसल, अमित चौधरी और सुमित कपाही।
क्या Lenskart सिर्फ ऑनलाइन कंपनी है?
सच: नहीं। कंपनी के भारत और विदेश में हजारों ऑफलाइन स्टोर भी हैं।
क्या पीयूष बंसल का पहला स्टार्टअप Lenskart था?
सच: नहीं। Lenskart से पहले उन्होंने SearchMyCampus शुरू किया था।
क्या पीयूष बंसल आज भी Microsoft में काम करते हैं?
सच: नहीं। उन्होंने Microsoft की नौकरी छोड़कर अपना बिजनेस शुरू किया।
क्या Lenskart एक विदेशी कंपनी है?
सच: नहीं। यह एक भारतीय कंपनी है, जिसका मुख्यालय गुरुग्राम में है।
क्या Lenskart सिर्फ भारत में काम करती है?
सच: नहीं। कंपनी कई देशों में अपना कारोबार कर रही है।
क्या पीयूष बंसल की नेट वर्थ का एक तय आंकड़ा है?
सच: नहीं। इंटरनेट पर अलग-अलग अनुमान मिलते हैं। कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है।
क्या Lenskart सिर्फ चश्मे बेचती है?
सच: नहीं। कंपनी चश्मे, सनग्लास, कॉन्टैक्ट लेंस और आईवियर से जुड़े कई उत्पाद बेचती है।
क्या Lenskart का IPO सफल नहीं रहा?
सच: IPO को निवेशकों का अच्छा समर्थन मिला था। लिस्टिंग के दिन शेयर में उतार-चढ़ाव जरूर रहा।
क्या पीयूष बंसल सिर्फ Lenskart पर ही काम करते हैं?
सच: नहीं। वे Shark Tank India में निवेशक भी हैं और कई स्टार्टअप्स में निवेश कर चुके हैं।
क्या Lenskart की सारी कमाई सिर्फ ऑनलाइन बिक्री से होती है?
सच: नहीं। कंपनी की ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अच्छी बिक्री होती है।
क्या Lenskart में सिर्फ विदेशी निवेशकों का पैसा है?
सच: नहीं। कंपनी में भारतीय और विदेशी दोनों तरह के निवेशक शामिल हैं।
क्या एक असफल स्टार्टअप के बाद पीयूष बंसल ने हार मान ली थी?
सच: नहीं। SearchMyCampus से मिली सीख ने ही उन्हें आगे चलकर Lenskart बनाने में मदद की।


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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Qपीयूष बंसल कौन हैं?
एक भारतीय उद्यमी, जो Lenskart के सह-संस्थापक व CEO और Shark Tank India के जज के तौर पर मशहूर हैं।
Qपीयूष बंसल का जन्म कब और कहाँ हुआ?
26 अप्रैल 1985 को नई दिल्ली में।
Qपीयूष बंसल की पत्नी कौन हैं?
पीयूष बंसल की पत्नी का नाम निधि मित्तल है। वे Lenskart Foundation से भी जुड़ी हैं और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहती हैं।
Qपीयूष बंसल के कितने बच्चे हैं?
पीयूष बंसल और उनकी पत्नी निधि मित्तल का एक बेटा है, जिसका नाम इवान (Ivan) है।
Qपीयूष बंसल की सैलरी कितनी है?
पीयूष बंसल की वार्षिक सैलरी समय-समय पर बदलती रहती है। उनकी आय का मुख्य स्रोत Lenskart में हिस्सेदारी, वेतन और अन्य निवेश हैं।
Qपीयूष बंसल के पिता कौन हैं?
उनके पिता बलकिशन बंसल चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं, जबकि उनकी माता किरण बंसल गृहिणी हैं।
QLenskart का मालिक कौन है?
Lenskart के सह-संस्थापक पीयूष बंसल, अमित चौधरी और सुमित कपाही हैं। कंपनी में कई भारतीय और विदेशी निवेशकों की भी हिस्सेदारी है।
QLenskart किस देश की कंपनी है?
Lenskart एक भारतीय कंपनी है, जिसका मुख्यालय गुरुग्राम, हरियाणा में स्थित है।
QLenskart का CEO कौन है?
पीयूष बंसल Lenskart के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं।
Qक्या पीयूष बंसल अरबपति हैं?
उनकी कुल संपत्ति को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं। हालांकि, उनकी अधिकांश संपत्ति Lenskart में हिस्सेदारी से जुड़ी है और इसका मूल्य समय के साथ बदलता रहता है।
Qक्या पीयूष बंसल शादीशुदा हैं?
हाँ, पीयूष बंसल की शादी निधि मित्तल से हुई है और उनका एक बेटा भी है।
Qपीयूष बंसल का धर्म क्या है?
पीयूष बंसल ने अपने धर्म के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। इसलिए इस विषय पर किसी भी अपुष्ट दावे पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
Qपीयूष बंसल कहाँ रहते हैं?
वे अपने परिवार के साथ गुरुग्राम (हरियाणा) में रहते हैं और वहीं से Lenskart के कारोबार का संचालन करते हैं।
Qपीयूष बंसल से कैसे संपर्क करें?
व्यक्तिगत संपर्क विवरण सार्वजनिक नहीं हैं। उनसे Lenskart की आधिकारिक वेबसाइट, LinkedIn या Shark Tank India के आधिकारिक माध्यमों से संपर्क किया जा सकता है।
Qपीयूष बंसल की सफलता की कहानी क्या है?
Microsoft की नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने SearchMyCampus शुरू किया, जो सफल नहीं हुआ। बाद में उन्होंने Lenskart की स्थापना की और उसे भारत की सबसे बड़ी आईवियर कंपनियों में बदल दिया।
Qक्या Lenskart अपने चश्मे खुद बनाती है?
हाँ, Lenskart की अपनी आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है, जहाँ बड़ी संख्या में फ्रेम और लेंस तैयार किए जाते हैं।
Qक्या Lenskart के चश्मे अच्छे होते हैं?
Lenskart अपने चश्मों की गुणवत्ता, वारंटी, होम आई टेस्ट और आसान रिटर्न नीति के कारण भारत के लोकप्रिय आईवियर ब्रांड्स में गिनी जाती है।
Qपीयूष बंसल की उम्र कितनी है?
2026 में वे 41 साल के हैं।
Qपीयूष बंसल की पढ़ाई कहाँ हुई?
डॉन बॉस्को स्कूल, दिल्ली से स्कूली शिक्षा; McGill University, कनाडा से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (2002–06); IIM बैंगलोर से मैनेजमेंट पढ़ाई।
Qक्या पीयूष बंसल IIT से पढ़े हैं?
नहीं, वे IIT की प्रवेश परीक्षा में सफल नहीं हो सके थे।
Qपीयूष बंसल ने Microsoft में क्या किया?
वे McGill से स्नातक होने के बाद सिएटल में Microsoft के प्रोग्राम मैनेजर थे, करीब एक साल तक।
Qपीयूष बंसल ने Microsoft क्यों छोड़ी?
वे अपना बिज़नेस शुरू करना चाहते थे, इसलिए 2007 में भारत लौट आए।
Qपीयूष बंसल का पहला स्टार्टअप कौन सा था?
SearchMyCampus.com — 2008 में शुरू हुई एक कॉलेज-क्लासिफाइड वेबसाइट, जो उसी साल बंद हो गई।
QLenskart कब शुरू हुई?
2010 में, अमित चौधरी और सुमित कपाही के साथ मिलकर, ऑनलाइन कॉन्टैक्ट लेंस बिक्री से।
QLenskart का पहला प्रोडक्ट क्या था?
कॉन्टैक्ट लेंस, चश्मे नहीं। चश्मे और सनग्लासेज़ 2012 में जोड़े गए।
QLenskart के सह-संस्थापक कौन हैं?
पीयूष बंसल, अमित चौधरी और सुमित कपाही।
Qपीयूष बंसल Lenskart में क्या भूमिका निभाते हैं?
वे सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं।
QLenskart कब यूनिकॉर्न बनी?
दिसंबर 2019 में, SoftBank Vision Fund के $275 मिलियन के निवेश के बाद।
QLenskart में कौन-कौन से बड़े निवेशक हैं?
SoftBank Vision Fund, Temasek, ADIA, KKR, Fidelity और BlackRock प्रमुख संस्थागत निवेशकों में शामिल हैं।
QLenskart का IPO कब आया?
IPO 31 अक्टूबर से 4 नवंबर 2025 तक खुला और शेयर 10 नवंबर 2025 को NSE-BSE पर सूचीबद्ध हुए।
QLenskart का बिज़नेस मॉडल क्या है?
एक वर्टिकली इंटीग्रेटेड ऑम्नीचैनल मॉडल — इन-हाउस डिज़ाइन, मैन्युफैक्चरिंग, और ऑनलाइन-ऑफलाइन दोनों चैनलों से बिक्री।
QLenskart के कितने स्टोर हैं?
मार्च 2025 तक 2,723 स्टोर, जिनमें से 2,067 भारत में और 656 विदेश में थे।
QLenskart किन देशों में मौजूद है?
भारत के अलावा जापान, सिंगापुर, दुबई और स्पेन सहित कई देशों में।
QLenskart ने कौन-कौन सी कंपनियां खरीदीं?
2022 में जापान की Owndays (करीब $400 मिलियन में बहुसंख्यक हिस्सेदारी) और 2025 में स्पेन की Meller (करीब 80% हिस्सेदारी)।
QLenskart की टेक्नोलॉजी में क्या ख़ास है?
3D वर्चुअल ट्राय-ऑन, होम आई-चेकअप, AI-पावर्ड आई टेस्टिंग और जर्मन रोबोटिक मैन्युफैक्चरिंग मशीनरी।
Qक्या Lenskart मुनाफ़े में है?
हाँ, FY25 में कंपनी ने ₹297 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पहले के वर्षों के घाटे से बड़ा बदलाव था।
Qपीयूष बंसल Shark Tank India में कब से हैं?
शो के पहले सीज़न (2021) से।
Qक्या पीयूष बंसल के अन्य निवेश भी हैं?
हाँ, वे Shark Tank India के ज़रिए और निजी तौर पर कई कंज़्यूमर व D2C स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं।
Qपीयूष बंसल का परिवार कैसा है?
पत्नी निधि मित्तल (विवाह 2011), पुत्र इवान (जन्म 2020)। पिता बलकिशन बंसल चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, माता किरण बंसल गृहिणी हैं।
Qपीयूष बंसल की पत्नी क्या काम करती हैं?
निधि मित्तल Lenskart Foundation की चेयरपर्सन हैं, जो नेत्र स्वास्थ्य व अंधता रोकथाम पर काम करती है।
Qपीयूष बंसल की नेट वर्थ कितनी है?
कोई आधिकारिक, सर्वसम्मत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है। मीडिया अनुमान ₹600 करोड़ से लेकर ₹7,000 करोड़+ और डॉलर अरबपति स्तर तक, बहुत भिन्न हैं।
QLenskart में पीयूष बंसल की कितनी हिस्सेदारी है?
रिपोर्ट्स के अनुसार करीब 8–10% के बीच, जिससे वे प्रमोटर समूह में सबसे बड़े व्यक्तिगत शेयरधारक हैं।
Qक्या पीयूष बंसल किसी विवाद में रहे हैं?
हाँ, 2022 में एक टिप्पणी को लेकर विवाद हुआ था, और 2026 में Lenskart की ग्रूमिंग-पॉलिसी को लेकर एक बड़ा सार्वजनिक विवाद हुआ, जिसके बाद कंपनी ने संशोधित नीति जारी की।
QLenskart की ग्रूमिंग-पॉलिसी विवाद क्या था?
एक लीक हुए आंतरिक दस्तावेज़ में कुछ हिंदू धार्मिक प्रतीकों पर प्रतिबंध बताया गया था, जिससे विवाद हुआ। कंपनी ने बाद में सभी धार्मिक प्रतीकों की अनुमति देने वाली संशोधित नीति जारी की।
QLenskart की प्रतिस्पर्धा किनसे है?
Titan EyePlus, Specsmakers, GKB Opticals जैसे पारंपरिक ऑप्टिशियन ब्रांड्स के साथ-साथ कई क्षेत्रीय व ऑनलाइन आईवियर रिटेलर।
Qक्या पीयूष बंसल के पास कोई और कंपनी भी है?
उनकी मुख्य कार्यकारी भूमिका केवल Lenskart में है; Shark Tank India में वे निवेशक व जज के तौर पर जुड़े हैं।
QLenskart का मुख्यालय कहाँ है?
गुरुग्राम, हरियाणा में।
QLenskart के कितने कर्मचारी हैं?
रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी 10,000 से ज़्यादा लोगों को रोज़गार देती है।
Qपीयूष बंसल की सफलता का सबसे बड़ा कारण क्या माना जाता है?
भरोसे की समस्या को टेक्नोलॉजी से हल करना, ऑम्नीचैनल रणनीति और इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग में लंबी अवधि का निवेश।
Qक्या Lenskart एक भारतीय कंपनी है?
हाँ, यह एक भारतीय बहुराष्ट्रीय आईवियर कंपनी है, जिसका मुख्यालय गुरुग्राम में है, भले ही इसमें विदेशी संस्थागत निवेशकों की बड़ी हिस्सेदारी हो।
Qपीयूष बंसल McGill University में क्या पढ़ते थे?
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, IT कंट्रोल व ऑटोमेशन विशेषज्ञता के साथ, 2002 से 2006 तक।
QLenskart का सब-ब्रांड John Jacobs क्या है?
यह Lenskart का प्रीमियम आईवियर सब-ब्रांड है, जो उच्च गुणवत्ता वाले डिज़ाइनर फ्रेम पर केंद्रित है।
Qक्या पीयूष बंसल ने Lenskart में पूरी हिस्सेदारी बेच दी?
नहीं, IPO में उन्होंने OFS के ज़रिए हिस्सेदारी का सिर्फ़ एक छोटा हिस्सा बेचा; वे कंपनी में सबसे बड़े प्रमोटर बने हुए हैं।
Qपीयूष बंसल आज क्या कर रहे हैं?
वे Lenskart के CEO के तौर पर कंपनी के वैश्विक विस्तार, मैन्युफैक्चरिंग व टेक्नोलॉजी रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं, और साथ ही Shark Tank India में जज बने हुए हैं।

फुटनोट एवं तथ्य संदर्भ

🔖 हर तथ्य का स्रोत, एक नज़र में
1 जन्म तारीख, परिवार व बुनियादी जानकारी — Wikipedia — Peyush Bansal
2 IPO लिस्टिंग की तारीख व शेयर प्रदर्शन — Business Standard — IPO Listing
3 IPO प्राइस बैंड, इश्यू साइज़, सब्सक्रिप्शन आंकड़े — Chittorgarh — IPO Details
4 फंडिंग राउंड, यूनिकॉर्न बनना, स्टोर संख्या, FY25 मुनाफ़ा — Tracxn — Funding & Investors
5 2023–24 की फंडिंग व मूल्यांकन विवरण — Inc42 — Funding Coverage
6 McGill University शिक्षा व Microsoft करियर — The Bull & Bear (McGill) — Profile
7 2026 ग्रूमिंग-पॉलिसी विवाद, निधि मित्तल का ज़िक्र — Business Today — Policy Controversy
8 लिस्टिंग-डे विश्लेषण — Goodreturns — Listing Analysis
9 नेट वर्थ के भिन्न मीडिया अनुमान — Journal — Net Worth Estimate

स्रोत एवं संदर्भ

✓ संपादकीय नोट एवं अस्वीकरण

यह जीवनी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध एवं सत्यापित स्रोतों — कंपनी फाइलिंग (DRHP), सेबी दस्तावेज़, IDC रिपोर्ट्स, आधिकारिक कंपनी घोषणाएँ, विश्वसनीय समाचार संस्थान, सार्वजनिक इंटरव्यू और उद्योग अनुसंधान — के आधार पर तैयार की गई है। जहाँ विभिन्न स्रोतों में मतभेद या अनुमान मौजूद हैं (जैसे नेट वर्थ, कंपनी वैल्यूएशन या अन्य सार्वजनिक दावे), वहाँ उन्हें स्पष्ट रूप से मीडिया अनुमान के रूप में दर्शाया गया है और सत्यापित तथ्यों से अलग रखा गया है।

सत्यापित तथ्य — आधिकारिक दस्तावेज़ या विश्वसनीय स्रोतों से पुष्ट जानकारी मीडिया अनुमान — सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित, आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं संपादकीय विश्लेषण — तथ्यों के आधार पर किया गया स्वतंत्र विश्लेषण, जिसे तथ्य नहीं माना जाना चाहिए

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अंतिम अपडेट: जुलाई 2026  |  संपादकीय समीक्षा: पूर्ण  |  तथ्य सत्यापन: आधिकारिक दस्तावेज़, सार्वजनिक स्रोत एवं उद्योग रिपोर्ट्स के आधार पर
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Shubham Sirohi
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